दिगंबर जैन परवार समाज के चंद्रप्रभु जिनालय की नवीन वेदी में विराजित होने वाली तीर्थंकर आदिनाथ से लेकर महावीर तक 24 तीर्थंकरों की रजत प्रतिमाओं के पंच कल्याणक के पूर्व मूर्ति पुण्यार्जकों के घरों मे भक्ति, भजन और गीतों की स्वर लहरियां गूंज रही हैं। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। दिगंबर जैन परवार समाज के चंद्रप्रभु जिनालय की नवीन वेदी में विराजित होने वाली तीर्थंकर आदिनाथ से लेकर महावीर तक 24 तीर्थंकरों की रजत प्रतिमाओं के पंच कल्याणक के पूर्व मूर्ति पुण्यार्जकों के घरों मे भक्ति, भजन और गीतों की स्वर लहरियां गूंज रही हैं। उल्लेखनीय है कि चौबीसी रजत प्रतिमाओं का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री विद्यासागर जी एवं आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आशीर्वाद से उनके शिष्य मुनि श्री विमल सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी विनय भैया बंडा के निर्देशन में 3 से 9 अप्रैल तक दलाल बाग में होगा। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि प्रतिष्ठित होने वाली सभी रजत प्रतिमाएं बीती रात कंचनबाग में जिनालय ट्रस्ट एवं परवार समाज के अध्यक्ष और एक मूर्ति के पुण्यार्जक राजेश अल्पना जैन लॉरेल के निवास पर बने पंडाल में एक साथ 24 प्रतिमाएं दर्शनार्थ रखी गई थी। इस उपलक्ष में गीत संगीत के साथ जिन भक्ति और गीत भजनों की स्वर लहरियां गूंजायमान हो रही थी। पुरुष एवं महिलाएं अपने मस्तक पर मूर्ति को रखकर नृत्य करते हुए खुशी से झूम रहे थे और
महिलाओं के स्वर गूंज रहे थे
भक्त के घर भगवान पधारे छाई खुशियों की बहार,चंद्र प्रभु के दर्शन करलो मिले पुण्य अपार/ आ ही गयो, आही गयो, आही गयो रे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव आ ही गयो रे/मेरे घर आए भगवान म्हारो मन नाचे/ नाचो गाओ खुशियां मनाओ मेरे घर आए भगवान
जैसे गीत भजनों की प्रस्तुति वहां उपस्थित महिलाओं पुरुषों को भाव विभोर कर रही थी।
यह समाज जन उपस्थित रहे
इस अवसर पर सभी मूर्तियों के पुण्यार्जक परिवार के सदस्यों के अलावा पंचकल्याण के प्रतिष्ठा महोत्सव के अध्यक्ष राजीव जैन बंटी भैया सहित दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाज श्रेष्ठी अमित कासलीवाल, डॉ. जैनेंद्र जैन, कैलाश जैन (केएस),अनिल जैनको, प्रमोद जैन, राकेश जैन चेतक, भरतेश बड़कुल, राजेश जैन दद्दू , सुदीप जैन,आलोक जैन, दिनेश जैन,जिनेश जैन अरविंद सोधीया लारेल, पुष्पा कासलीवाल, सीमा रावत, मालती जैन, ममता खासगीवाला, समता सोधिया आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम के बाद सभी मूर्ति पुण्यार्जक अपनी अपनी प्रतिमाएं अपने घर ले गए। जहां वे भी समारोह पूर्वक गीत संगीत और भक्ति की स्वर लहरियां गुंजायमान करवाएंगे।













Add Comment