नरीमन सिटी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में भरत-कुसुम मोदी संत निवास का भूमि पूजन हुआ। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। नरीमन सिटी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन एक अत्यंत पुण्य और ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में भरत-कुसुम मोदी संत निवास का भूमि पूजन अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। इस पावन अवसर पर समाज के प्रतिष्ठित जन भरत मोदी, संजय पाटौदी एवं राहुल सेठी द्वारा विधिवत भूमि पूजन किया गया। इस धार्मिक और ऐतिहासिक कार्यक्रम में नरीमन सिटी जैन मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य भी उपस्थित रहे, जिनमें प्रदीप बिलाला, प्रवीण जैन, ऋषभ जैन, नीलेश मोदी, राजेश जैन, राहुल जैन और गौरव जैन सहित अनेक समाजजन उपस्थित थे। भूमि पूजन के बाद अपने आशीर्वचन में मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि संत निवास का निर्माण केवल एक भवन का निर्माण नहीं है, बल्कि यह संतों की सेवा और साधना के लिए समर्पित एक पवित्र स्थान होगा। उन्होंने कहा कि इंदौर शहर में यह संत निवास संतों की सेवा और उनके निवास के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा, जिससे साधु-संतों को साधना और प्रवास के समय उत्तम सुविधा प्राप्त होगी तथा समाज को भी धर्म श्रवण का अधिक अवसर मिलेगा।

संतों की सेवा और धर्म कार्य में योगदान सौभाग्य
इस अवसर पर उपस्थित समाजजनों ने भरत-कुसुम मोदी परिवार के इस सहयोग और धर्मप्रेम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। सभी ने कहा कि इंदौर शहर में भरत मोदी द्वारा समाज और धर्म के क्षेत्र में जो सेवाएँ और कार्य किए जा रहे हैं, वे वास्तव में प्रेरणादायी हैं और समाज के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। अपने उद्बोधन में भरत मोदी ने कहा कि संतों की सेवा और धर्म कार्य में योगदान देना हम सभी का सौभाग्य है।
आदर्श धार्मिक केंद्र बनाएं
भरत मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि संत निवास का निर्माण शीघ्र पूर्ण होगा और आने वाले समय में इसका सदुपयोग समाज और संतों की सेवा के लिए होगा। उन्होंने समाजजनों से भी आग्रह किया कि सभी मिलकर इस पुण्य कार्य को आगे बढ़ाएँ और इसे एक आदर्श धार्मिक केंद्र बनाने में सहयोग करें। कार्यक्रम का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से परिपूर्ण रहा। सभी ने मिलकर यह मंगल कामना की कि यह भरत-कुसुम मोदी संत निवास आने वाले समय में संतों की सेवा, धर्म साधना और समाज के आध्यात्मिक उत्थान का एक प्रमुख केंद्र बने।













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