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मानव सेवार्थ समर्पित रहेगा विहसंतसागर तीर्थधाम : विहसंत सागर तीर्थधाम का संपन्न हुआ शिलान्यास समारोह 


तीर्थों का निर्माण अपनी संस्कृति को संरक्षित करने और मानव कल्याण हेतु किया जाता है । सकल दिगम्बर जैन समाज के गुरुभक्तों के सहयोग से विहसंत सागर तीर्थधाम का निर्माण होने जा रहा है। मुरैना/जैतपुरा से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना/जैतपुरा। तीर्थों का निर्माण अपनी संस्कृति को संरक्षित करने और मानव कल्याण हेतु किया जाता है। सकल दिगम्बर जैन समाज के गुरुभक्तों के सहयोग से विहसंत सागर तीर्थधाम का निर्माण होने जा रहा है। यह तीर्थ मानव सेवा के लिए समर्पित रहेगा। किसी भी अच्छे कार्य के लिए धन की कमी नहीं होती, यही कारण है कि विहसंत सागर तीर्थधाम के निर्माण के लिए धन कुबेरों ने स्वेच्छा से अपने धन के भंडार खोल दिए हैं। इस क्षेत्र के निर्माण में जैन ही नहीं बल्कि अजैन बंधु भी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। हम सभी की भावना है कि धन कुबेरों के अलावा समाज के हर तबके का व्यक्ति इस क्षेत्र में अपना सहयोग प्रदान करें, ताकि भावनात्मक रूप से वह इस क्षेत्र से जुड़ा रहे । इटावा सदर की विधायक ने भी इस क्षेत्र के निर्माण में हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। यह एक मात्र ऐसा नव निर्माणाधीन क्षेत्र होगा जिसमें एक समय में एक साथ 15 परियोजनाओं का शिलान्यास हो रहा है। उदी रोड से जैन तीर्थ शौरीपुर बटेश्वर जाते समय 50 किलोमीटर के रास्ते में जैन साधु साध्वियों के लिए कोई भी विश्राम स्थल नहीं होने के कारण ही यहां तीर्थ निर्माण का विचार मन में आया था, जो अतिशीघ्र मानव सेवार्थ समर्पित होगा। यह उद्गार उपाध्याय विहसंतसागरजी महाराज ने जैतपुरा, उदी मोड़, इटावा में विहसंत सागर तीर्थधाम शिलान्यास समारोह के अवसर हजारों हजारों की संख्या में उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

एक साथ 15 परियोजनाओं का हुआ शिलान्यास

गणाचार्य श्रीविरागसागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य उपाध्याय श्री विहसंत सागरजी महाराज की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से उपाध्यायश्री के ससंघ पावन सान्निध्य में नवनिर्माणाधीन विहसंत सागर तीर्थधाम में रविवार को एक साथ 15 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। आने वाले समय में क्षेत्र पर भगवान मल्लिनाथ जिनालय, त्यागीवृति आश्रम, चिकित्सालय, औषधालय, संग्रहालय, विरागोदय आहारशाला, गौशाला, तीर्थंकर वाटिका। विरागोदय गुरुकुल। त्रिकाल चौबीसी मानस्तंभ, ध्यान केंद्र, आश्रय भवन, ऑडिटोरियम, अन्नपूर्णा भवन भोजनशाला, यात्रीनिवास धर्मशालाओं सहित विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया । गुरुभक्त साधर्मी बंधुओं ने मुख्य शिला के साथ साथ नंद्यावर्तक शिला, नवदेवता शिला, स्वर्ण शिला, रजत शिला, ताम्र शिला स्थापित कर तीर्थधाम के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया।

150 से अधिक बसों से पहुंचे 10 हजार श्रद्धालु

कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न स्थानों से 150 से अधिक बस एवं सैकड़ों की संख्या में चार पहिया वाहनों से दस हजार से अधिक की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वाहनों की भरमार के कारण पूरे दिन हाइवे पर जाम की स्थिति रही। विहसंत सागर चेरिटेबल ट्रस्ट की ओर से सभी आगंतुक बंधुओं के लिए चाय, स्वल्पाहार एवं भोजनादि की समुचित व्यवस्था की गई थी। ट्रस्ट की ओर से सभी दानदाताओं, ट्रस्टियों अतिथियों, सहयोगियों एवं विशिष्ट बंधुओं का सम्मान किया गया । इस पावन अवसर पर मुरैना से भी सैकड़ों बंधुओं ने सहभागिता प्रदान की।

 उपाध्याय विहसंतसागरजी को दी नई पिच्छिका

शिलान्यास समारोह के पावन अवसर पर उपाध्याय विहसंतसागरजी महाराज को नवीन पिच्छिका प्रदान की गई। गुरुभक्त परिवार ने पूर्ण श्रद्धा, भक्ति के साथ भक्ति करते हुए मोर पंखों से बनी पिच्छिका प्रदान की।

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