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ऋषभदेव की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें : तीर्थंकर दिवस पर मुख्यमंत्री ने जैन समुदाय और प्रदेशवासियों को दी बधाई


भगवान ऋषभदेव के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक तीर्थंकर दिवस (ऋषभ नवमी) के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उन्हें नमन करते हुए अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय सहित समस्त प्रदेश वासियों को बधाई दी। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…


जयपुर। युग के आदि प्रवर्तक एवं जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के जन्म एवं दीक्षा कल्याणक तीर्थंकर दिवस (ऋषभ नवमी) के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उन्हें नमन करते हुए अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय सहित समस्त प्रदेश वासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भगवान ऋषभदेव के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शाश्वत तीर्थ अयोध्या में जन्मे देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति के आराध्य एवं प्रेरणास्त्रोत है। जैन आगमों के साथ ही श्रीमद्भागवत गीता में भी उनकी महान साधना और लोककल्याणकारी योगदान का अत्यन्त श्रद्धा के साथ उल्लेख मिलता है। वे आदि योगी थे,जिन्होंने भारत वर्ष की जनता को प्रवृति और निवृति के संतुलन की महान आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करते है ” कृषि करो और ऋषि बनो का अमर संदेश दिया। मुख्यमंत्री के साथ अल्पसंख्यक मामलात विभाग के कैबिनेट मंत्री (अतिरिक्त प्रभार) भजनलाल शर्मा ने बताया कि देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव का जीवन सत्य,अहिंसा, करुणा,तप और आत्मसंयम जैसे उच्च मानवीय मूल्यों का अनुपम उदाहरण है।

उनका आदर्श जीवन हमे नैतिकता,आत्मानुशासन और लोकमंगल के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। तीर्थंकर दिवस (ऋषभ नवमी) के अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जैन समुदाय और प्रदेशवासियों से देवाधिदेव भगवान ऋषभदेव की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करने तथा समाज में सद्भाव,शांति और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने का संकल्प लेने की अपील की।

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