युग के आदि में अषि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प का उपदेश देने वाले जैन दर्शन के प्रथम तीर्थंकर तथा इस धरती के पहले चक्रवर्ती सम्राट राजा ऋषभदेव, जिन्हें आदि ब्रह्मा आदिनाथ स्वामी के नाम से जाना जाता है, की जन्म जयंती श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में जिनशासन एकता संघ के संयोजन में भक्ति भावपूर्वक मनाई गई। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
अशोकनगर। युग के आदि में अषि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प का उपदेश देने वाले जैन दर्शन के प्रथम तीर्थंकर तथा इस धरती के पहले चक्रवर्ती सम्राट राजा ऋषभदेव, जिन्हें आदि ब्रह्मा आदिनाथ स्वामी के नाम से जाना जाता है, की जन्म जयंती श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में जिनशासन एकता संघ के संयोजन में भक्ति भावपूर्वक मनाई गई।
इस दौरान राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ द्वारा डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा सभी धर्मों के लोगों को आमंत्रित कर भगवान आदिनाथ जी का जन्म कल्याणक अत्यंत प्रभावना के साथ मनाया गया।
समारोह के प्रारंभ में भगवान श्री आदिनाथ स्वामी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, जिन शासन एकता संघ के अध्यक्ष विपिन सिंघई, डॉ. हेमंत टडैया सहित अन्य प्रमुख जनों द्वारा किया गया।
विश्व युद्ध की राह पर खड़ी दुनिया को भगवान ऋषभदेव के सिद्धांतों की जरूरत — विजय धुर्रा
समारोह को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि आज का पवित्र दिन हमारे वर्तमान काल के प्रथम तीर्थंकर 1008 श्री आदिनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव का है। राजा ऋषभदेव इस धरती के पहले सम्राट थे। उन्होंने अषि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प का उपदेश देकर मानवता की कड़ियों को एक सूत्र में बांधा। आज उनके सिद्धांतों की विश्व को आवश्यकता है। विश्व शांति के लिए राजा ऋषभदेव के सिद्धांतों को अपनाना जरूरी है।
जिन शासन एकता संघ के अध्यक्ष विपिन सिंघई ने कहा कि हमारे जिले में दर्शन तीर्थ थूवोनजी, चंदेरी, कदवाया और मियांदांत जैसे पवित्र तीर्थ हैं, जहां भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) की विशाल प्रतिमाएं विश्व को शांति का संदेश दे रही हैं। हमें उनके उपदेशों से अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए।
नर से नारायण बनने की कठिन डगर दिखाई राजा ऋषभदेव ने — रघुवंशी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से दिनेश रघुवंशी ने कहा कि नर से नारायण बनने की कठिन डगर पर राजा ऋषभदेव चले। उनकी घोर तपस्या का वेदों में भी विशेष उल्लेख मिलता है। उसी तपस्या के कठोर पथ पर हमारे आचार्य भगवंत विद्यासागर जी महाराज और राष्ट्र संत श्री सुधासागर जी महाराज चल रहे हैं। हमने उनकी कठिन साधना को नगर में देखा है। उनके सान्निध्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी समारोह भी इसी गंज मैदान में मनाया गया था।
जैन युवा वर्ग से डॉ. हेमंत टडैया ने कहा कि राजा ऋषभदेव नारी शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने बेटियों की शिक्षा को अनिवार्य माना और स्वयं राज्य व्यवस्था में व्यस्त रहते हुए भी ब्राह्मी और सुंदरी को अक्षर ज्ञान देकर सभी कलाओं में पारंगत बनाया। हमें इससे प्रेरणा लेकर अपने बच्चों को ऐसे विद्यालयों में शिक्षा दिलानी चाहिए, जहां संस्कार और अनुशासन का वातावरण हो।
जैन समाज अध्यक्ष ने धन्यवाद ज्ञापित कर किया बहुमान
इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल ने सभी महानुभावों को आदि ब्रह्म परमेश्वर श्री आदिनाथ भगवान के जन्म एवं तप कल्याणक महा महोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी आगंतुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आप सभी के प्रेरणादायक विचारों से हम अपने जीवन को और अधिक उन्नत बनाएंगे।
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद मध्य भारत के धर्म प्रमुख डॉ. दीपक मिश्रा, अशोक रघुवंशी, ऋषभ बाझल, राकेश गुप्ता सहित सभी प्रमुख जनों का पंचायत कमेटी द्वारा सम्मान किया गया।
महामस्तकाभिषेक के साथ जगत कल्याण की कामना से हुई शांति धारा
इस दौरान जगत कल्याण की कामना से महाशांति धारा की गई, जिसका सौभाग्य दिनेश महिदपुर, अभिजीत कुमार वरखेड़ा, सुचित कुमार, सचिन कुमार कांसल, ऋषभ कुमार बहादुरपुर, राजीव कुमार जाट, सतेन्द्र कुमार, लोकेश कुमार पीरोट, धर्मेन्द्र कुमार रोकड़िया सहित अन्य भक्तों को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर आदिश्वर धाम सुभाष गंज के बड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी का 108 रिद्धि कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने पंक्तिबद्ध होकर महामस्तकाभिषेक का सौभाग्य प्राप्त किया।
इस दौरान जैन समाज के मंत्री शैलेन्द्र श्रागर ने कहा कि सभी जीव निरोग रहें तथा सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण रहें। सभी जीवों के कल्याण की भावना के साथ मंगल कामना की गई। इसके पश्चात भगवान की महापूजन संपन्न हुई।
अड़तालीस दीपों से जगमगाया जिनालय, हुई महाआरती
संध्या को आरती के बाद श्री भक्तावर मंडल सुभाष गंज द्वारा अड़तालीस दीपों से जिनालय को आलोकित करते हुए महाआरती की गई। महाआरती से पूर्व रिद्धि मंत्रों की आराधना करते हुए श्री भक्तावर जी का संगीतमय पाठ किया गया तथा दीप प्रज्ज्वलन के साथ दीप आराधना की गई।
भक्तों ने भक्ति भावपूर्वक एक-एक दीप प्रज्ज्वलित कर दीपों की स्थापना की। इसके पश्चात भक्तामर मंडल के सत्यम सिंघई, विजय धुर्रा, संचित बजाज, डॉ. पंकज जैन सहित अन्य भक्तों द्वारा मधुर भजनों के साथ भगवान की भक्ति की गई।
जिले भर में मनाई गई आदिनाथ जन्म जयंती
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी की जन्म जयंती आंचल के सबसे बड़े तीर्थ अतिशय क्षेत्र दर्शनोंदय तीर्थ थूवोनजी में भी धूमधाम से मनाई गई। यहां भगवान आदिनाथ स्वामी का अभिषेक तथा 108 रिद्धि मंत्रों से विशेष अभिषेक किया गया।
मियांदात में मुनिश्री के सान्निध्य में हुई महापूजा
चंदेरी के निकट जंगल में स्थित अतिशय क्षेत्र मियांदात में मुनिश्री अविचल सागर जी महाराज के सान्निध्य में भगवान आदिनाथ की जन्म जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। इस दौरान भगवान का कलशाभिषेक एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्तों ने पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त किया।
मुंगावली में भगवान का पालना झुलाकर मनाई आदिनाथ जयंती
मुंगावली में आदिनाथ स्वामी की जन्म जयंती पर भगवान का भक्ति भावपूर्वक पालना झुलाया गया। इस दौरान भगवान आदिनाथ का अभिषेक और विधि-विधान से महापूजन किया गया। सभी मंदिरों में भक्तों ने जल, चंदन, अक्षत और पुष्प से विशेष पूजा-अर्चना की।
शाडारौ में भी मनाई गई जयंती
शाडारौ में भी भगवान आदिनाथ स्वामी की जन्म जयंती पर महिला मंडल द्वारा विशेष द्रव्य थाल सजाकर भगवान का गुणगान किया गया। इस अवसर पर भगवान आदिनाथ स्वामी का कलशाभिषेक तथा जगत कल्याण की कामना से महाशांति धारा की गई।













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