श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण पर मुनि श्री सुधासागर महाराज ने तीर्थंकर आदिनाथ इस युग के धर्म तीर्थ प्रवर्तक और राजा श्रेयांस दान तीर्थ प्रवर्तक बताते हुए कहा कि महान आत्माए दूसरों का कल्याण किए बिना अपना कल्याण नहीं करती। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर…
ललितपुर। श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में ज्ञान कल्याण पर मुनि श्री सुधासागर महाराज ने तीर्थंकर आदिनाथ इस युग के धर्म तीर्थ प्रवर्तक और राजा श्रेयांस दान तीर्थ प्रवर्तक बताते हुए कहा कि महान आत्माए दूसरों का कल्याण किए बिना अपना कल्याण नहीं करती। जब हम बुरे निमित्त से प्रभावित होंगे, बुरा होगा, संसार बुरा नहीं है। हर व्यक्ति तुम्हारे साथ बुरा कर रहा लेकिन घबराना नहीं अगर संसार के भय से डर रहे हो तो गलत है। मुनि श्री ने स्त्रियों की वेषभूषा पर व्यंग करते हुए कहा कि वह भेष धारण मत करो। जिससे दुनिया के परिणाम बिगड़ें। मुनि श्री ने आहार दान के प्रसंग में बताया कि आज ज्ञान कल्याणक का वह दिन है मुनिराज आदि सागर जी ने मुनि दीक्षा के छह माह वाद आहारग्रहण किया। उस समय श्रावक मुनिराज की आहार विधि भी नहीं जानते थे। उन्होंने श्रावकों को प्रेरित किया कि दुर्व्यसन गुटका आदि का त्याग कर जीवन को संयमी बनाए।
लोकार्पण पुण्यार्जक परिवार ने किया
इसके पूर्व प्रातःकाल श्री जी का अभिषेक शांतिधारा के उपरान्त ज्ञान कल्याणक की पूजन हुआ। इसके उपरांत प्रतिष्ठाचार्य बालब्रहमवारी प्रदीप भैया सुयश ने मुनिराज आदिसागर की आहारचर्या की विधि कराई। मध्यान्ह में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में अयोध्यापुरी में समवशरण की रचना हुई। जिसका लोकार्पण पुण्यार्जक परिवार ने किया। समवशरण में विराजित देव शास्त्र गुरु की पूजन करने वैमानिक, कल्पवासी, व्यंतर, भवनवासी देवगण पहुंचे। जिन्होंने समवशरण में अपनी मनोकामना की पूर्ति की भावना से पूजन उपस्थित इन्द्र इन्द्राणियों के साथ की।
इस मौके पर समोवशरण से निर्यापक श्रवण मुनि सुधासागर महाराज ने संसार को नश्वर बताते हुए कहा सारी दुनिया को समझो जीवन अर्थ के अभाव में अनर्थ हो रहा है वह भूल जाता है कि उसका प्रयोजन करने से कितना अनर्थ हो जाता है। भक्त की भक्ति भगवान बनने की रहती है लेकिन इसका दुरूपयोग करके वह सर्वनाश कर लेता है। उन्होने कहा मोक्ष मार्ग के लिए कर्मों का क्षय कर मुनिव्रत पालन करना है लेकिन अर्थ किया के अभाव में भटक जाता है और प्रयोजन का स्वरूप भूल जाता है। महाराज श्री ने कहा जैन दर्शन जीवन में जोडने की शिक्षा देता है काटने की नहीं भगवान आदिनाथ ने असि कृषि और मसी की शिक्षा देकर श्रावक के छह आवश्यक बताए और कहा पाप दुखदाई है परिग्रह युक्त हैं इनको छोड़े वगैर पुण्य नही होगा। उन्होने पंचकल्याणक से सीख लेते हुए जीवन को संस्कारित बनाने की प्रेरणा दी।
इच्छुरस वितरित किया गया
सायंकाल सायंकाल जिज्ञासा समाधान के दौरान मुनि श्री ने श्रावकों द्वारा की गई जिज्ञासाओं का सम्यक समाधान किया। आचार्य भक्ति जिज्ञासा समाधान के उपरान्त सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन सत्येन्द्र शर्मा एण्ड पार्टी दिल्ली के कलाकारों द्वारा प्रस्तुति की गई। मुनिराज आदिकुमार के आहार के उपलक्ष्य में सानत इन्द्र आनद जैन साइकिल परिवार द्वारा इच्छुरस वितरित किया गया। आयोजन की व्यवस्थाओं को सतोदय तीर्थ सेरोन अध्यक्ष सतीश जैन बंटी, महामंत्री सिंघई मनोज जैन, कोषाध्यक्ष विजय जैन लागौन, अरविन्द जैन बरोदा, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, नीतेश विलौआ, अमितेश जैन, मुकेश जैन नेता, राजेन्द्र मिठ्या, श्रयांस जैन गदयाना, अरूण जैन, अजय जैन, अभय जैन, अमित जैन, प्रदीप जैन, अवध किशोर जैन के अतिरिक्त जैन पंचायत के अध्यक्ष डा० अक्षय टडया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत खजुरिया समेत पूरी टीम द्वारा संयोजित की जा रही हैं।
भगवान का मोक्षकल्याणक एवं गजस्थ परिक्रमा
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में 9 मार्च नैमेत्तिक अभिषेक पूजन के बाद प्रात: 7.29 बजे भगवान आदिनाथ को कैलाश पर्वत से मोक्ष गमन तत्पश्चात अग्निकुमार देवों का आगमन, प्रभु के नख केश का विसर्जन मुनि श्री के मांगलिक प्रवचनों के उपरान्त मोक्षकल्यणक पूजन एवं विश्वशान्ति हवन होगा। उक्त जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने बताया कि दोपहर 12-30 बजे गजरथ परिक्रमा मुनि श्री के प्रवचन तदुपरान्त सायंकाल 6 बजे आचार्य भक्ति जिज्ञासा समाधान होगा।













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