आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागर से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का दिनांक धरियावद, राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधि मरण हो गया। पढ़िए धरियावद से राजेश पंचोलिया की यह पूरी खबर…
धरियावद। दिन रात मेरे स्वामी, में भावना यह भावु। देहांत के समय मे तुमको न भूल जावू। मरण समय गुरु पाद मूल हो व्रत संयम पालू, पंडित पंडित मरण हो ऐसा अवसर दो। इन सार गर्भित भावनाओ को बिरले ही भव्य जीव अपने जीवन मे चरितार्थ करते है। आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य मुनिश्री पुण्य सागरजी से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का दिनांक 24 मार्च 2025 को पूर्वाह्न 9.40 बजे धरियावद, राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधि मरण हो गया।
डोला विमान यात्रा हजारों की उपस्थिति में निकाला गया
ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, विकास भैया, लक्की रमावत ने बताया कि दोपहर 12.10 बजे समाधिस्थ 82 वर्षीय मुनिश्री पूर्ण सागरजी का डोला विमान यात्रा आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी संघ सानिध्य और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निकाला गया। मुनिश्री के डोले के आगे कमंडल लेकर भूमि शुद्धि का, मुनिश्री के डोले को कंधे लगाने का सौभाग्य महावीर, राजेंद्र मेहता थांदला एवं परिजनों को प्राप्त हुआ। नियत समाधि स्थल परिसर में पंडित हंसमुखजी के निर्देशन में मंत्रोचार से स्थल शुद्धि की गई। समाधिस्थ मुनिश्री की पूजन शांतिधारा और पंचामृत अभिषेक गृहस्थ अवस्था के परिजन पुत्र महावीर, राजेंद्र थांदला एवं परिवार द्वारा किया गया। परम पूज्य मुनिश्री की समाधि के कारण संघ के सभी साधुओं ने आज उपवास किया। अग्नि संस्कार के पश्चात उपस्थित आचार्य संघ, आर्यिका माताजी एवं समस्त समाज ने परिक्रमा देकर अपनी विनयाजंलि प्रस्तुत की।
मुनिश्री पूर्ण सागरजी का सामान्य परिचय
थांदला मध्यप्रदेश के श्री रतनलाल मेहता 81 वर्षीय ने मुनिश्री पुण्य सागरजी संघ समक्ष दीक्षा हेतु श्रीफल अर्पित किया। आपकी क्षुल्लक दीक्षा चतुर्थ पट्टाधीश आचार्यश्री अजीत सागरजी के शिष्य परम पूज्य मुनिश्री पुण्य सागरजी के करकमलों से सिद्धक्षेत्र सोनागिर में 9/07/2023 को हुई। आपका नूतन नामकरणजी क्षुल्लक श्री पूर्ण सागर हुआ। आपने जन्म नगरी थांदला मध्यप्रदेश में गृहस्थ अवस्था के भतीजे मुनिश्री पुण्य सागरजी से 6/5/2024 को मुनि दीक्षा ग्रहण की। गृहस्थ अवस्था की पत्नी ने भी आर्यिका दीक्षा लेकर श्री पूर्णिमामति बनी। उनकी भी समाधि पूर्व में ही हो गई। कुछ दिन पूर्व आपके केश लोचन भी आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी एवं अन्य साधुओं ने किए।
52 साधुओं के संघसानिध्य में णमोकार मंत्र सुनते हुए हुआ
22 मार्च 2025 को आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनिश्री पुण्य सागरजी एवं संघ के सभी साधुओं से क्षमा याचना कर क्षमा भाव धारण कर चारो प्रकार के अन्न जल आदि का आजीवन त्यागकर यम संल्लेखना धारण कर सभी प्रकार के आहार का त्याग किया। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, मुनि श्रीपुण्य सागरजी सहित संघ के साधु संबोधन करते रहे। यम संलेखना धारी मुनिश्री पूर्ण सागरजी का शांत परिणामो से निराकुलता सहित दिनांक 24 मार्च 2025 को पूर्वान्ह 9.50 बजे उत्कृष्ट समाधि मरण आचार्यश्री वर्धमान सागरजी, दीक्षा गुरु मुनिश्री पुण्य सागरजी सहित 52 साधुओं के संघ सानिध्य में आचार्यश्री के श्रीमुख से अरिहंत सिद्ध णमोकार मंत्र सुनते हुए हुआ। क्षपक मुनि पूर्ण सागरजी की विमान डोलयात्रा चन्द्र प्रभु संतभवन, परिसर से रवाना होकर समाधि स्थल पहुंची।
धार्मिक विधि विधानपूर्वक अंतिम संस्कार हुए
राजस्थान प्रांत के अनेक नगरों पारसोला, बांसवाड़ा, थांदला रीछा ,धरियावद, नरवाली, मुंगाडा, गामड़ी, दाहोद के हजारों गुरुभक्तों ने भाग लिया समाधिस्थल पर पूर्ण विधि विधान से विमान यात्रा पूर्व नियत स्थल पर ले गए जहाँ पर पूर्ण विधि विधान से समाधिस्थ मुनिश्री के धार्मिक संस्कार कर पूजन पंचामृत अभिषेक किए गए। अग्नि संस्कार पूर्व गृहस्थ अवस्था के पुत्र महावीर, राजेंद्र मेहता एवं परिजनों द्वारा किये गए।













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