सनावद नगर के श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में विराजित मुनिश्री विश्व सूर्य सागर जी एवं मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में वर्षायोग हेतु मंगल कलश स्थापित किए गए। इसके साथ ही महामंत्र जाप अनुष्ठान का आयोजन भी हुआ। पढ़िए सन्मति जैन की विस्तृत खबर…
सनावद। नगर में चातुर्मास हेतु विराजित मुनिश्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज एवं मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के सान्निध्य में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर जी में वर्षायोग हेतु मंगल कलश स्थापना विधिपूर्वक संपन्न हुई।
सन्मति जैन काका ने बताया कि सर्वार्थ सिद्धि योग में प्रातःकाल पंचामृत अभिषेक के पश्चात जिन पूर्णार्जक परिवारों द्वारा लिए गए कलशों में मंगल सामग्री (पीली सरसों, सुपारी, हल्दी, सिक्के, नाड़ा, पंचरत्न, कपूर) भरकर मुनिश्री द्वारा स्वस्तिक मंडप पर अभिमंत्रित कर मंदिर जी में स्थापित किए गए।
इसके पश्चात मुनिश्री विश्व सूर्य सागर जी ने अपनी देशना में आगम पंथ, संयमित वाणी और गद्दी के योग्य वक्ता की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वक्ता को श्रोता की भावना और भविष्य दोनों का ध्यान रखना चाहिए।
अधिक बोलना असत्य का कारण बन सकता है
उन्होंने समझाया कि “कम बोलने का प्रयास करिए, अधिक बोलना असत्य का कारण बन सकता है। यदि आत्मरक्षा करनी है तो मन, वचन, काया तीनों को संयमित करना आवश्यक है। दोपहर में मुनिश्री साध्य सागर जी के निर्देशन में मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ महामंत्र जाप अनुष्ठान संपन्न हुआ, जिसमें 108 लौंग से आहुतियाँ देकर मंत्रोच्चारण किया गया। समाजजन ने मंत्र जाप में आस्था से भाग लिया।













Add Comment