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शांतिनाथ भगवान की आराधना करने से सातिशय पुण्य की प्राप्ति होती है : श्री शांतिनाथ महामंडल विधान की विशेष पूजा-अर्चना में भक्ति वातावरण 


श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर गुदड़ी मंसूर खां में सोलह दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान आयोजित किया जा रहा है। जिसके 15वें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम भगवान शीतलनाथ की वृहद शांतिधारा की। आगरा से शुभम जैन की यह खबर…


आगरा। श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर गुदड़ी मंसूर खां में सोलह दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान आयोजित किया जा रहा है। जिसके 15वें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम भगवान शीतलनाथ की वृहद शांतिधारा की। शांतिधारा करने का सौभाग्य नायक परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा के बाद उपस्थित इंद्र-इंद्राणियों ने प्रभु की आराधना करते हुए विधि-विधान के साथ विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कीं। आगरा दिगंबर जैन परिषद के पदाधिकारियों एवं नवीन कार्यकारिणी के सदस्यों ने चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया। यह विधान पंडित सौरभ जैन शास्त्री के निर्देशन में हुआ। उन्होंने विधान का महत्व बताते हुए कहा कि जैन संस्कृति में 16 दिवसीय शुक्ल पक्ष का विशेष महत्व है।

इन दिनों शांतिनाथ भगवान की आराधना करने से सातिशय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस संबंध में पुराणों में वर्णन आता है कि रामायण काल में भगवान मुनिसुव्रतनाथ के शासनकाल में मथुरा नगर में महामारी का प्रकोप हुआ था। हजारों की संख्या में प्रजाजन हताहत होने लगे, उसी समय वहां पर एक अवध ज्ञानी मुनिराज का आगमन हुआ। मथुरा नगर के राजा ने मुनिराज के दर्शन कर उनसे इस महामारी के शमन का उपाय पूछा, तब उन्होंने 16 दिवसीय शुक्ल पक्ष में श्री शांतिनाथ भगवान की पूजा-अर्चना करने का उपदेश दिया। तब इस अनुष्ठान के करने से महामारी का शमन हुआ। तभी से जैन परंपरा में यह आयोजन करने का क्रम निरंतर चल रहा है। इस अवसर पर सुभाष जैन, वीरेंद्र जैन, देवेंद्र जैन, रविंद्र जैन ,संजीव जैन, धर्मेंद्र जैन, नायक,सुनील जैन, विपिन जैन, पंकज जैन, संजीव जैन, ध्रुव जैन, सुशीला जैन, शांति जैन, सुनीता जैन, सुमन जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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