निकटवर्ती दिगंबर जैन मंदिर लार में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी पर्वराज पर्युषण पर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की पूजन आराधना एवं शांतिधारा में युवा वर्ग का उत्साह देखने लायक रहा। प्रातःकालीन बेला में सामूहिक अभिषेक करने का सौभाग्य डाक्टर अरबिंद्र जैन एवं शांतिधारा करने का महासौभाग्य मुकेश जैन, राजेश जैन को प्राप्त हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट..
टीकमगढ़। निकटवर्ती दिगंबर जैन मंदिर लार में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी पर्वराज पर्युषण पर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की पूजन आराधना एवं शांतिधारा में युवा वर्ग का उत्साह देखने लायक रहा। प्रातःकालीन बेला में सामूहिक अभिषेक करने का सौभाग्य डाक्टर अरबिंद्र जैन एवं शांतिधारा करने का महासौभाग्य मुकेश जैन, राजेश जैन को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात् संगीतमय पूजन उपरांत दशलक्षण विधान का वाचन किया गया। पंडित कमल कुमार शास्त्री द्वारा बताया तु क्षमा का धारी तो वह है जिसे गालियां सुनकर भी क्रोध ना आए। क्रोध की उग्रता तो दूर मन में भी खेद तक उत्पन्न न हो, तब तक वह क्षमा है। आत्मा के समीप रहना, आत्मा में विलीन हो जाना, विभाव से स्वभाव की ओर लौटना।
जब हम बाह्य जगत से अलग होकर अंतर्मुखी हो जाते हैं, लालच से संतोष भाव में, क्रोध से क्षमा में, हिंसा से अहिंसा में, अभिमान से विनम्रता में, विषय वासनाओं से ब्रह्मचर्य में चले जाते हैं तो इसका नाम है पर्युषण पर्व। अधिकतर पर्व लौकिक होते हैं जिनमें हर्ष, उल्लास, आमोद-प्रमोद के साथ शरीर का पोषण किया जाता है। पर्युषण पर्व लोकोत्तर पर्व है जिसमें शरीर का नहीं आत्मा का पोषण किया जाता है। पर्युषण पर्व आत्म-जागृति का पर्व है। आत्म-जागृति के लिए अनिवार्य है अपने कर्म बंधनों को शिथिल करना।
इसलिए पर्युषण पर्व में जप, तप, ध्यान, दान, प्रायश्चित इत्यादि धर्म क्रियाओं द्वारा आत्मा के ऊपर आए कर्मों के आवरण को कम किया जाता है। समस्त कार्यक्रम पंडित कमलकुमार शास्त्री एवं विजय जैन के कुशल निर्देशन सम्पन्न किये गये।













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