भगवान महावीर धर्मस्थल में विराजित आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज के चातुमार्सिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बह रही है। आचार्य श्री ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार के जो भी सुख है, वह छवगवंत है, उनमें अनंत सुख है। जिसकी कल्पना करना भी निरर्थक है। पढ़िए सुनील कुमार सेठी की रिपोर्ट…
गुवाहाटी। भगवान महावीर धर्मस्थल में विराजित आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज के चातुमार्सिक प्रवचन के माध्यम से धर्म और ज्ञान की गंगा बह रही है। आचार्य श्री ने धर्म सभा में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार के जो भी सुख है, वह छवगवंत है, उनमें अनंत सुख है। जिसकी कल्पना करना भी निरर्थक है। आचार्य श्री ने कहा कि आदमी जब अकेला रहता है तो दो पैर का रहता है, तो सुखी रहता है। जैसे ही विवाह हो जाता है, तो चार पैर का होते ही दुखी होना शुरू हो जाता है। एक बच्चा होते ही छह पैर का हो जाता है। जैसे छह पैर की मक्खी होती है, और वह हर जगह भिन्न-भिन्न करती रहती है। एक और बच्चा होते ही आठ पैर का हो जाता है, आठ पैर की मकड़ी होती है। मकड़ी अपना जाल खुद बुनती है और वह उसमें ही मर जाती है। ऐसे ही संसारिक जीव सुख के साधन खोजता रहता है और वह उसमें ही फंस कर मर जाता। इसीलिए आत्मिक सुख ही सबसे बड़ा शाश्वत सुख है।

शाश्वत सुख अपनी आत्मा में
उन्होंने कहा कि इंद्रीय सुख शाश्वत नहीं है, छवंगवत है। शाश्वत सुख ही आत्मा का सुख है। आत्मा का सुख एक बार प्राप्त हो जाए, तो फिर इच्छा वगवंत सुख कोई मायने नहीं रखता है। स्वर्गों में सुख ही सुख है। मनुष्यों में सुख ज्यादा, दुख कम है। त्रिजंयो में दुख ज्यादा, सुख कम है। यह जीवन हमारा ऐसा ही है। नरक में दुख ही दुख है। इसीलिए हमें शाश्वत सुख ही पाना है तो हमें छवगवंत सुख को छोड़ना पड़ेगा। पदार्थों में शाश्वत सुख नहीं है व शरीर में भी शाश्वत सुख नहीं है। शाश्वत सुख अपनी आत्मा में है । उसको पाने का प्रयास करो। इससे पूर्व आचार्य श्री प्रमुख सागर के सान्निध्य एवं मुखारविंद से महावीर धर्म स्थल में स्थित चंद्रप्रभु चैत्यालय में श्रीजी की शांतिधारा करने का परम सौभाग्य कैलाशचंद, प्रकाशचंद, विनोद कुमार, कमल कुमार, पवन कुमार काला परिवार रंगिया/गुवाहाटी/दिल्ली को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर काफी संख्या में गुरु भक्त उपस्थित थे। यह जानकारी समाज के प्रचार प्रसार विभाग के मुख्य संयोजक ओम प्रकाश सेठी व सह संयोजक सुनील कुमार सेठी ने दी।













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