आर्यिका श्री विसंयोजनाश्री माताजी ने आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत भवन में धर्मसभा को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने धर्म का महत्व बताया। पुण्य अर्जित करने के लिए समाजजनों को प्रेरित किया। सनावद से पढ़िए, यह खबर…
सनावद। पुण्य करोगे तो आप सुखमय जीवन व्यतीत करोगे। पुण्य के बिना तो मुनि नहीं बन सकते, पुण्य क ेबिना धर्म कार्य नहीं कर सकते। पुण्य बिना भगवान के दर्शन भी नसीब नहीं होते। पुण्य के बिना मुनियों के दर्शन भी नसीब नहीं होते। इसीलिए पुण्य चाहिए। पुण्य बिना अखंड नही बन सकते है। यह उद्गार नगर में विराजमान गणाचार्य 108 श्री विरागसागर जी महाराज की शिष्या 105 आर्यिका श्री विसंयोजनाश्री माताजी ने व्यक्त किए। वे श्री आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत भवन में धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं। समाज प्रवक्ता सन्मति काका ने बताया कि रविवार सुबह धर्मसभा का शुभारंभ रेखा राकेश जैन के मंगलाचरण से हुआ। नगर में विराजमान गणाचार्य 108 श्री विरागसागर जी महाराज की शिष्या 105 आर्यिका श्री विसंयोजनाश्री माताजी ने धर्मसभा में कहा कि धर्म का बैंक बैलेंस बनाइए और धर्म के बैंक बैलेंस में एक नियम बनाइए कि हम महीने में एक बार साधु संतों को आहार करवाएंगे। साधु हों तो भी चोका लगाएंगे और साधु नहीं हो तो भी चौका लगाकर हम भाव बनाकर आहार करंेगे। जो 8 दिन, 15 दिन तथा महीने भर में जितनी बार भी चौका लगा सकते हो उतनी बार चौका लगाने ने की भावना भाओ। आहार दान का बहुत ही महत्व है।
पुण्य का बैलेंस हमारे जीवन में बढ़ जाएगा
महीने में एक बार धार्मिक यात्रा पर जाएं साधु संत आएं हों तो उन्हें लेने जाएं। आहार विहार करवाएं। उनकी वैयावृत्ती कर पुण्य का संचय कर धर्म को अपने बैंक बैलेंस में जोड़ें। जो कि अगले जन्म में आप को बहुत ऊंचाइयां देगा। जैसे हम सांसारिक कार्यों के लिए समय निकालते उसी प्रकार अपने जीवन में परमार्थ कार्यों के लिए धर्म कार्य के लिए भी समय निकालना प्रारंभ कर दें तो हमारा जीवन सफल ओर सार्थक हो जाएगा और पुण्य का बैलेंस हमारे जीवन में बढ़ जाएगा और पुण्य का बैलेंस बढ़ेगा तो सबकुछ अपने आप प्राप्त हो जाएगा। सारे रोग शोक कष्ट अशांति अपने आप नष्ट हों जाएंगे और ध्यान रखना ये पुण्य ही आप को अधर्म अवस्था तक ले जाएगा। इसलिए हमें अपने जीवन में ज्यादा से ज्यादा पुण्य संचय करना है क्योंकि, पुण्य में लगेंगे तो सुख उपयोग में लगेंगे तो हमारा सब काम अच्छा होगा। इसलिए हम धन को छोड़कर धर्म के पीछे दौड़ना प्रारंभ कर दे। इसी कड़ी में शाम को आर्यिका माताजी द्वारा गुरु भक्ति प्रश्न मंच संपन्न हुए। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।













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