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चार्तुमास में धर्म सभा का आयोजन : दूसरों की प्रशंसा करते-करते स्वयं के अस्तित्व को न भूलें -मुनि श्री सुधासागर


हरिपर्वत स्थित महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ। इस अवसर पर निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि लोग कहते हैं कि अच्छा समय आएगा, हम अच्छे हो जाएंगे। नहीं, समय कभी अच्छा आता ही नहीं लेकिन यदि हम अच्छे हो गए तो सारा समय अच्छा ही होता है। पढ़िए राहुल जैन की रिपोर्ट…


आगरा। हरिपर्वत स्थित महावीर दिगम्बर जैन मन्दिर में धर्मसभा का प्रारम्भ आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर हुआ। जिसमें श्रावक परिवार ने मुनिश्री का पाद प्रक्षालन कर मुनिश्री को शास्त्र समर्पित किए। मंच का संचालन मनोज जैन ने किया l

अच्छे हो जाएं तो सब अच्छा हो जाएगा

इस अवसर पर निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि लोग कहते हैं कि अच्छा समय आएगा, हम अच्छे हो जाएंगे। नहीं, समय कभी अच्छा आता ही नहीं लेकिन यदि हम अच्छे हो गए तो सारा समय अच्छा ही होता है। संसार जैसा था वैसा ही रहेगा, उसे बदलने की नहीं, समझने की चेष्टा करना। सृष्टि हमारे अनुसार नहीं चलेगी, हमें सृष्टि के अनुसार चलना पड़ेगा। संसार मे जो कुछ भी पाप है वे पाप रहेंगे लेकिन हमे कुछ ऐसी कला सीखनी है कि पाप और पापियों के बीच मे रहकर भी हम पापी नहीं कहलाएं। न अष्टमी अच्छी है, न चतुर्दशी अच्छी है, न अष्टानिका अच्छी है, न दशलक्षण अच्छे हैं। यदि हम अच्छे हो गए तो अमावस्या भी अच्छी है, शुभ है। सबसे अशुभ तिथि है स्वभाव से अमावस्या लेकिन भगवान महावीर के अच्छे होने पर सबसे अशुभ तिथि भी शुभ बन गई। इस दुनिया का रिमोट कंट्रोल किसके हाथ में है, हमारे हाथ में है। पूज्यवर कहते हैं कि होगा वही जो आत्मा को मंजूर है। जो भी बिगड़ रहा है हमने बिगाड़ा है, जो भी बनेगा हमसे बनेगा। कोई दुनिया की ताकत मेरी जिंदगी को बिगाड़ नहीं सकती, किसी में ताकत नहीं। समयसार पढ़ते समय ये अनुभूति करें मैं दुनिया का सर्वशक्तिमान व्यक्तित्व हूं, द्रव्य हूं। दुनिया का सबसे पवित्र आदमी मैं हूँ, अपने को शाबाशी दो। हम दूसरों की प्रशंसा करते-करते स्वयं के अस्तित्व को भूल जाते है। जब व्यक्ति को असमर्थता की अनुभूति महसूस होती है तो नीति कहती है कि तुम्हें जो चाहिए है वो तुम्हारे पास नहीं है क्या, नहीं है तो फिर तुम्हारी सब कुछ स्वाधीनता खत्म हो गयी। हमारे पास दो तरीके हैं जीने को। पहला तरीका है कि जो तुम्हारे पास नहीं है और वो किसी के पास है तो तुम्हें कैसा लग रहा है। क्या एक अहोभाग्य, शगुन भाव आया। उसको देखते ही तुम्हारा रोम रोम पुलकित हो जाये और उसके वैभव को देखकर के तुम्हें जय जिनेंद्र का भाव आ जाए समझ लेना तुम्हारा भविष्य बहुत उज्ज्वल है। मैं हीरा नहीं हूं, मैं हीरा बन नही सकता, चारों तरफ से निर्णय हो गया है, अब आनंद लेना है, रोने नहीं बैठ जाना।

लेने का भाव मत रखो

मुनि श्री ने कहा कि पंचमकाल में कोई व्यक्ति हीरा नहीं बन सकता, भगवान नहीं बन सकता लेकिन आनंद लेना है तुम्हे अनुभूति हो जाये इतनी सी – मैं हीरा तो नही हूं लेकिन सौभाग्य है मेरा, मैं हीरा को पहचानता हूं, मैं वो शक्ति हूं जो हीरा का मूल्य आंकता हूँ, मैं वो शक्ति हूं। मेरे कथन पर हीरा बाजार में अनमोल हो जाता है। किसी समर्थवान व्यक्ति से कुछ लेने का भाव आना हमारी शक्तियों को समाप्त करना है। हमारा वीक पॉइंट है कि हम किसी भी व्यक्ति को अपनी चाहत की वस्तु देखकर के उससे लेने का भाव करते हैं, लेने का भाव करते ही हमारा पुण्य क्षय होगा। पर की वस्तु कभी फोकट में आने वाली नहीं है, उसका बिल लगता है। जिंदगी में एक ही बात का वरदान मांगो, एक साधना, एक ही तपस्या करो, मुझे जिंदगी में कभी किसी से कुछ भी लेने की जरूरत न पड़े, भाव भी न हो, भगवान से भी नहीं, गुरु से भी नहीं क्योंकि जैसे ही लेने का भाव आता है हमारा पुण्य क्षीण हो जाता है। उन्होंने कहा कि हम कितने भी अभाव में क्यों न हो जो मेरे पास चीज नहीं है वो किसी के पास है तो उससे हम लेने का भाव नहीं करेंगे। यदि लेने का भाव आ भी जाये तो, लेने का भाव तो है लेकिन मागूंगा नहीं। आशीर्वाद भी मांगकर नहीं लूंगा। यदि मांगकर लिया है तो कर्ज है और उसने दिया व तुमने ले लिया तो खर्च है।

धर्म सभा में ये रहे मौजूद

धर्म सभा में प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठ्या, मनोज बाकलीवाल, नीरज जैन, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन, राजेश सेठी, अमित जैन बॉबी, राजेश सेठी, विवेक बैनाड़ा, महेश जैन, अनिल जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, राजेश बैनाड़ा, नरेश जैन, सुरेन्द्र पांडया, अंकेश जैन, राहुल जैन, समकित जैन, राजेश जैन सहित आगरा सकल जैन समाज के बडी़ संख्या में गुरुभक्त उपस्थित रहे।

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