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हम क्रोध की आग को नहीं शांति के दीप को जलाएंगे : मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी ने रक्षाबंधन का आशय समझाया


पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज संघ का चातुर्मास पथरिया में चल रहा है। आचार्य श्री के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि- रक्षाबंधन का अर्थ सिर्फ बहन की कलाई पर धागा बाँधना नहीं है। यह एक स्मरण है कि हमें केवल अपने प्रियजनों की नहीं, अपने आत्म-स्वरूप की भी रक्षा करनी है। पथरिया से पढ़िए, यह खबर…


पथरिया। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील कोल्हापुर ने कहा कि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ का चातुर्मास पथरिया में शुरु हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने पथरिया में अपने प्रवचन में कहा कि- रक्षाबंधन का अर्थ सिर्फ बहन की कलाई पर धागा बाँधना नहीं है। यह एक स्मरण है कि हमें केवल अपने प्रियजनों की नहीं, अपने आत्म-स्वरूप की भी रक्षा करनी है। जब हम दूसरों की रक्षा करते हैं, तो वो मानवता है और जब हम अपने भीतर की आसक्ति, क्रोध, मोह से रक्षा करते हैं, तो वो धर्म है। विष्णु कुमार ने 700 मुनियों की रक्षा की लेकिन कैसे? बल से नहीं, भक्ति से। हिंसा से नहीं, विवेक और संयम से। आज हम भी प्रण लें कि हम क्रोध की आग को नहीं,

शांति के दीप को जलाएंगे। हम बंधेंगे, लेकिन राग-द्वेष में नहीं,सच्चे प्रेम, संयम और मैत्री के बंधन में। यही है सच्चा रक्षाबंधन। जहाँ हम दूसरों के लिए जीते हैं और आत्मा के लिए जागते हैं।

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Shreephal Jain News

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