धर्मसभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता टोंक, पाद प्रक्षालन का सौभाग्य स्वर्गीय शंकरलाल मोहनी बाई एवं समस्त बाकलीवाल परिवार पांडिचेरी एवं विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता, टोंक को प्राप्त हुआ। टोंक से विकास जैन की पढ़िए, यह खबर…
टोंक। सभी को देव ,शास्त्र ,गुरु के दर्शन विनय और विधिपूर्वक करना चाहिए, भगवान के समक्ष पांच पुंज,गुरु के समक्ष तीन पुंज और जिनवाणी के समक्ष चार पुंज चढ़ाए जाते हैं। आप अपने अच्छे कार्यों से भगवान भी बन सकते हैं। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने आदिनाथ जिनालय नसिया टोंक में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति और धर्म की राह अपनाने से भगवान बन सकते हैं जीवन की दिशा परिवर्तित बदलने से दशा बदलती है। आप आचार्य ,उपाध्याय ,साधु परमेष्ठी के जीवन को देखकर ,अपना कर सुख प्राप्त कर सकते हैं। संतों का दर्शन, समागम, अवलंबन जरूरी है। भगवान बनने के लिए संयम और दीक्षा लेना जरूरी है साधु बनने से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। गुर भक्त राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि आप जहां निवास करते हैं वह निवास स्थाई नहीं है हर पर्याय ,गति में आपके मकान रूपी शरीर बदलते रहते हैं किंतु संसारी प्राणियों को वर्तमान में ही क्षणिक भौतिक सुख अच्छा लगता है। मरने पर परिजन संपदा, सामग्री साथ नहीं जाती धार्मिक धर्म कार्यों से किए गए कार्यों कर्मों अनुसार पुण्य और पाप साथ जाते हैं।
सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र के प्रतीक 3 पुंज
इसके लिए आचार्य श्री ने सूत्र दिया कि सभी को भगवान सहित शास्त्र और गुरुओं के दर्शन विधि और विनय पूर्वक करना चाहिए। भगवान के समक्ष 5 पुंज, गुरुओं आचार्य साधु परमेष्ठि समक्ष सम्यक दर्शन, ज्ञान और चारित्र के प्रतीक 3 पुंज और जिनवाणी के समक्ष चार अनुयोग चढ़ाए जाना चाहिए। आपके द्वारा किए जा रहे कार्यों से अगली पर्याय गति नियत होती है आचार्य श्री के उपदेश के पूर्व निवाई गौरव आर्यिकाश्री पूर्णिमा मति माताजी ने धर्म उपदेश ने बताया कि जैन होना,जैन दिखना और जैन बनना में अंतर है जैन सिद्धांतों जिनेन्द्र भगवान की वाणी का पालन करना चाहिए अनछने पानी की एक बूंद में असंख्यात जीव जैन धर्म अनुसार ओर वैज्ञानिक अनुसार एक अनछने बूंद में 36450 जीव होते है।सभी को आचार्य श्री समक्ष छोटे नियम व्रत लेना चाहिए।
शांतिधारा और अभिषेक का किया पुण्यार्जन
प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया धर्मसभा के पूर्व श्री आदिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता टोंक, पाद प्रक्षालन का सौभाग्य स्वर्गीय शंकरलाल मोहनी बाई एवं समस्त बाकलीवाल परिवार पांडिचेरी एवं विशेष अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन करने का सौभाग्य शांतिधारा परिवार बड़ा तख्ता, टोंक को प्राप्त हुआ। इस मौके पर सुनील सर्राफ एवं विनोद सर्राफ के मीठे-मीठे मधुर भजनों पर भक्तिमय आराधना की तथा मिट्ठूलाल दाखिया ने जिनवाणी स्तुति की। प्रतिदिन निवाई, जयपुर, कोटा, इंदौर, पांडिचेरी आदि से गुरु भक्त पधारकर धर्म लाभ ले रहे हैं।
यह समाजजन रहे मौजूद
इस मौके पर कमल सर्राफ, नीटू छामुनिया, ओम ककोड़, ज्ञानचंद संघी, उमेश संघी, अम्मू छामुनिया, अंशुल आरटी, अंकित बगड़ी, मुकेश दतवास, सुमित दाखिया, अनिल कंटान, पंकज फूलेता, लोकेश कल्ली, विकास अत्तार, नरेंद्र दाखिया, नरेंद्र अतार, मनीष अतार, सोनू पासरोटियां, पुनीत जागीरदार, गोलू माधोपुरिया, प्रदीप बगड़ी आदि समाज के लोग रहे।













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