विचार भट्टारक श्री प्रमेय सागर जी की माताजी, जन्मदात्री श्रीमती छोटी बाई जैन को 5 अगस्त 2025 को सूरत स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, पर्वत पाटिया में क्षुल्लिका दीक्षा मिली। पढ़िए पूरी खबर…
प. पू. समाधि सम्राट युगप्रतिक्रमण प्रवर्तक गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महामुनिराज के मंगल आशीर्वाद एवं पूज्य पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज की आज्ञा से, 5 अगस्त 2025 को सूरत स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, पर्वत पाटिया में भव्य दीक्षा समारोह का आयोजन हुआ।
इस पावन अवसर पर श्रमणी आर्यिका श्री 105 विबोध श्री माताजी ससंघ (9 पिच्छी) के पावन सान्निध्य में, विचार भट्टारक श्री प्रमेय सागर जी स्वामी जी की गृहस्थ अवस्था की माताजी एवं जन्मदात्री छोटी बाई जैन (छिंदवाड़ा निवासी) ने क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण की। आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल मंत्रोच्चारण के साथ, श्रमणी आर्यिका विबोध श्री माताजी के करकमलों से दीक्षा संपन्न हुई। नामकरण संस्कार में उनका नाम रखा गया — क्षुल्लिका श्री 105 विश्रुत श्री माताजी।
यह क्षण जैन धर्म की अद्वितीय परंपरा का प्रतीक बना
बरसों से चल रही तप-साधना और त्याग की भावना का प्रतिफल इस दीक्षा में मिला। दीक्षा के अगले ही दिन, 6 अगस्त 2025 की प्रातः 6:10 बजे, पूज्य माताजी ने निर्दोष समाधि मरण प्राप्त किया। यह क्षण जैन धर्म की उस अद्वितीय परंपरा का प्रतीक था, जिसमें जीवन के अंतिम समय में भी व्यक्ति अपनी मृत्यु को महोत्सव में बदल सकता है। अंतिम यात्रा में अपार जनसमूह उपस्थित रहा। डोला, श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, पर्वत पाटिया से बड़े हर्ष और आध्यात्मिक उल्लास के साथ निकला। अंतिम संस्कार, श्री अतिशय क्षेत्र विद्यानंद जी स्वामी, कतारगाम (सूरत) में, विचार भट्टारक श्री प्रमेय सागर जी के निर्देशन में, पूर्ण शास्त्रीय विधि-विधान से प्रातः 10:30 बजे संपन्न हुआ।
जिस मां ने अपने इकलौते पुत्र को मोक्षमार्ग पर चलाया, उसी को उसी पुत्र ने मोक्षमार्ग की अंतिम सीढ़ी — दीक्षा — देकर सद्गति का पथ दिखाया। यह घटना न केवल छिंदवाड़ा का गौरव है, बल्कि पूरे जैन समाज के लिए प्रेरणा का अद्वितीय उदाहरण भी है।













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