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धार्मिक क्रियाओं से पुण्य की उत्पत्ति होती है: रविवार से जैन मंदिर में चल रहा है सिद्धचक्र विधान


श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में चल रहा है। मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। विधान के प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32, चतुर्थ दिन 64, पांचवंे दिन 128, छठवें दिन 256, सातवें दिन 512 एवं अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर…


मुरैना। सांसारिक प्राणी को सदैव धार्मिक अनुष्ठान करते रहना चाहिए। धार्मिक क्रियाओं से पुण्य की उत्पत्ति होती है और पुण्य से पापों का क्षय होता है। अपने इष्ट का ध्यान, जप, पूजन करने से सुखों की प्राप्ति के साथ मन की शांति प्राप्त होती है। जहां धर्म होता है, जो लोग धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हैं, वहां धर्म उनकी रक्षा करता है। पुण्य से ही व्यक्ति धनवान और ऐश्वर्यवान बनता है। धर्मात्मा व्यक्ति अपने भावों को शुद्ध रखता हुआ अपने चित्त को शुभता की ओर लगता है। उसके हृदय में सदैव शुभ भाव उत्पन्न होते है। इसलिए हमें सदैव पुण्य का अर्जन करना चाहिए। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज के आशीर्वाद से आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के पावन सानिध्य एवं संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन एवं प्रतिष्ठाचार्य राजेंद्र शास्त्री मगरौनी के आचार्यत्व में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना की जा रही है। विधान के प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32, चतुर्थ दिन 64, पांचवंे दिन 128, छठवें दिन 256, सातवें दिन 512 एवं अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।

प्रतिदिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम 

पुण्यार्जक परिवार मुन्नालाल, राकेशकुमार, रोबिन जैन, गौरव जैन, सौरभ जैन एवं समस्त चोरम्बार जैन परिवार की ओर से 4 मई से प्रारंभ हुए श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ में 5 से 10 मई तक प्रतिदिन प्रातः 5.30 बजे जाप, 5.55 बजे अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, 7.40 बजे से विधान, 8.30 बजे मुनिश्री के प्रवचन, शाम 07.30 बजे गुरु भक्ति, आरती, 8.30 बजे शास्त्र सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। भजन गायक एवं संगीतकार स्वर लहरी सैंकी एंड पार्टी फिरोजाबाद प्रतिदिन संगीतमय गुरु भक्ति, महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी। अंतिम दिन 11 मई को प्रातः विश्व शांति महायज्ञ होगा। महायज्ञ में सभी लोग विश्व शांति की कामना के साथ अग्निकुंड में आहुति देंगे। विधान समापन पर श्री जिनेंद्र प्रभु के कलषाभिषेक, सम्मान समारोह और वात्सल्य भोज का आयोजन रखा गया है।

मैना सुंदरी ने कराया था सिद्धचक्र महामंडल विधान

जैन सिद्धांतों के अनुसार मैनासुंदरी के पति श्रीपाल को कोढ़ की बीमारी थी। दिगंबर मुनिराज के उपदेशानुसार मैना सुंदरी ने आठ दिवसीय सिद्धचक्र महा मंडल विधान करते हुए सिद्धों की भक्ति करते हुए आठ दिन में 1024 अर्घ्य समर्पित किए थे और प्रतिदिन श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक का गंधोदक अपने कोढ़ी पति को लगाया था। जिससे उसके पति एवं अन्य लोगों का कोढ़ समाप्त हुआ था। तभी से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का महत्व माना जाने लगा है। इसे विधानों का राजा भी कहा जाता है।

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