विश्व जैन संगठन कनाडा द्वारा श्री जैन मंदिर टोरंटो में महामहिम संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की स्मृति में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि विनयांजलि सभा में मुख्य अतिथि भारत के कौंसल जनरल सिद्धार्थ नाथ, जैन मंदिर के श्रद्धालु और कई हिंदू संस्थानों के प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
टोरंटो। विश्व जैन संगठन कनाडा द्वारा श्री जैन मंदिर टोरंटो में महामहिम संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की स्मृति में विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि विनयांजलि सभा में मुख्य अतिथि भारत के कौंसल जनरल सिद्धार्थ नाथ, जैन मंदिर के श्रद्धालु और कई हिंदू संस्थानों के प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे। सभा को ट्रस्टी विदुर जैन ने पूर्ण सहयोग दिया। सभा को संबोधित करते हुए विश्व जैन संगठन कनाडा के संस्थापक और अध्यक्ष विजय जैन ने आचार्य श्री के कठोर तप और भारतीय समाज के प्रति उनके योगदान का वर्णन किया।
जैन ने बताया कि आचार्य श्री ने अपने जीवन काल में कुल 500 से अधिक दीक्षा दीं। आचार्य श्री ने हिंदी एवं संस्कृत साहित्य में अमूल्य योगदान दिया है। आचार्य श्री की प्रेरणा 150 से अधिक गौशालाओं में लाखों गायों को सरंक्षण दिया जा रहा है। आचार्य श्री ने अहिंसामयी कुटीर उद्योग की प्रेरणा दी। इसके फल स्वरुप हथकरघा का पुनरुत्थान हुआ। आचार्य श्री की प्रेरणा से जेल में बंदियों को रोजगार मिला है और वो जेल से ही अपने परिवार को सपोर्ट कर पा रहे हैं।
आचार्य श्री ने सदैव गौहत्या बंदी के लिए विशेष आग्रह किया। उन्होंने अपने प्रवचनों में समाज को मातृभाषा, हिंदी, संस्कृत और संस्कृति से जुड़े रहने पर विशेष जोर दिया। जैन ने बताया आचार्यश्री को सच्ची विनयांजलि उनके द्वारा बताए गए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चल कर ही हो सकती है। जैन ने मुनि रक्षा के लिए कौंसल जनरल समक्ष एक प्रस्ताव रखा। उन्होने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी के नाम से संपूर्ण भारत मे एक ट्रेल सिस्टम (पगडंडी) बनाया जाए जिस पर केवल पैदल लोग ही चलें। हमारे सारे साधु-संतों का इससे संरक्षण होगा। कौंसल जनरल सिद्धार्थ नाथ ने आश्वासन दिया कि वो ये सुझाव भारत सरकार तक पहुंचाएंगे। विश्व जैन संगठन कनाडा के अध्यक्ष विजय जैन मूलतः राजस्थान डूंगरपुर में पाड़वा ग्राम से है, जो पिछले 20 वर्ष विदेश में जा बसे हैं।













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