समाचार

अहंकार नहीं, विनम्रता ही बनाती है व्यक्ति को सच्चा नेता : विनम्रता में छिपी है नेतृत्व की सच्ची कला – मुनि प्रमाण सागर


भोपाल के अवधपुरी में चल रहे पर्युषण महापर्व पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कहा कि विनम्रता ही सच्चे नेतृत्व की आत्मा है। अहंकारी व्यक्ति केवल हुकूमत करता है, पर विनम्र व्यक्ति प्रभाव डालता है। उन्होंने मार्दव धर्म की साधना और विनम्रता अपनाने के उपाय बताए। पढ़िए अविनाश जैन विधावाणी की ख़ास रिपोर्ट…


भोपाल के अवधपुरी में पर्वराज पर्युषण महापर्व के दूसरे दिन मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने उत्तम मार्दव धर्म पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की अंधी दौड़ में मनुष्य ने विनम्रता को भुला दिया है, जबकि यही सच्चे नेतृत्व का आधार है। अहंकारी व्यक्ति केवल हुकूमत करता है, लेकिन विनम्र व्यक्ति अपने प्रभाव से समाज को जोड़ता है।

मुनि श्री ने समाज में बढ़ती असहिष्णुता, आक्रोश और संवादहीनता पर चिंता व्यक्त की और कहा कि परिवारों में पीढ़ियों के बीच अहं का टकराव बड़ा कारण है। कार्यस्थलों पर टीमवर्क की कमी और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग भी इसी का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि मार्दव साधना के लिए आवश्यक है – हर परिस्थिति को स्वीकार करना, दूसरों की प्रशंसा करना, क्रोध के क्षणों में मौन साधना और भावनायोग के माध्यम से आत्मनिरीक्षण। उन्होंने सामूहिक नियम दिया कि “आज कोई कुछ भी कहेगा तो मैं छोड़ दूँगा” अर्थात क्रोध पर नियंत्रण रखूँगा।

अभिषेक और शांतिधारा संपन्न 

प्रातःकाल भगवान का अभिषेक और शांतिधारा संपन्न हुई। तत्पश्चात संस्कार शिविर का ध्वजारोहण कोलकाता के सरावगी परिवार ने किया। इस अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। दशलक्षण धर्म विधान के बाद मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित समस्त संघ मंचासीन रहा और सामूहिक ध्यान कराया गया। मुनि श्री ने अंत में कहा – “विनम्रता कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल की पहचान है। अहंकार हुकूमत करता है, पर विनम्रता प्रभाव छोड़ती है।”

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page