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श्री भक्तामर महामंडल विधान का चौथा दिन : ऐसे शब्द उच्चारित करें, जिनसे दूसरों को आनंद प्राप्त हो – मुनि पूज्य सागर


दशा हुमड़ दिगंबर जैन समाज, पारसोला की ओर से अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज, आर्यिका प्रसन्न मति माताजी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर के सानिध्य में हो रहे श्री भक्तामर महामंडल विधान में चौथे दिन 13 काव्य की आराधना करते हुए 728 श्रीफल के साथ 728 अर्घ्य सौधर्म इन्द्र शैलेश-अल्पा घाटलिया ने समर्पित किए। सुबह 5 बजे से अनार, अंगूर, दही, दूध से भगवान का अभिषेक अनुष्ठान में बैठे 108 श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किया गया। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


पारसोला। अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज, आर्यिका प्रसन्न मति माताजी और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर के सानिध्य में चल रहे सात दिवसीय श्री भक्तामर महामंडल विधान अनुष्ठान के चौथे दिन 13 काव्य की आराधना करते हुए 728 श्रीफल के साथ 728 अर्घ्य सौधर्म इन्द्र शैलेश-अल्पा घाटलिया ने समर्पित किए।

भक्तामर के 48 काव्यों में 31 काव्य की आराधना पूर्ण हो चुकी है। सुबह 5 बजे से अनार, अंगूर, दही, दूध, आमरस, घी आदि से भगवान का अभिषेक अनुष्ठान में बैठे 108 श्रावक-श्राविकाओं द्वारा किया गया।

अभिषेक में शांतिधारा का सौभाग्य सारिका – राकेश घाटलिया हितांशी-अरविंद वगेरिया को प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम का आयोजन दशा हुमड़ दिगंबर जैन समाज, पारसोला की ओर से किया जा रहा है। आज भक्तामर के 20वें काव्य की विशेष आराधना का सौभाग्य शीतल-विवेक खोड़निया को और 26वें काव्य की विशेष आराधना करने का सौभाग्य मांगीलाल वगेरिया परिवार को मिला। शाम को 48 दीपक से भक्तामर की आराधना सिद्ध महिला मंडल द्वारा की गई।


आराधना करते समय भगवान से मिलाएं मन

इस अवसर पर अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि भगवान के मंत्रों में जितने अक्षर हैं, वे अपने आप में सिद्ध और अभिमंत्रित हैं। इन्हें हम बीज अक्षर कहते हैं। इसलिए हम जब भी भगवान की आराधना करते हैं और मंत्र पढ़ते हैं तो हम ध्यान देकर वे मंत्र पढ़ने चाहिए। मंत्र पढ़ते वक्त जैसा हमारा ध्यान होगा, वैसा ही फल हमें प्राप्त होगा।

अगर हमारा ध्यान शुभ में होगा तो हमें शुभ फल मिलेगा और ध्यान अशुभ में होगा तो अशुभ फल मिलेगा। भगवान की मूर्ति की प्रतिष्ठा करते समय भी हम विशेष मंत्रों का उच्चारण करते हैं, तभी वह प्रतिमा प्रतिष्ठित मानी जाती है। इसलिए शब्दों का बड़ा प्रभाव पड़ता है। हमें उन्हीं शब्दों को उच्चारित करना चाहिए, जिनसे दूसरों की प्रसन्नता हो, दूसरे सुखी हों, उन्हें आनंद आए।

तभी हमें धर्म की आराधना का वास्तविक फल मिल सकेगा। जीवन में यह संकल्प करें कि कभी भी किसी से बात करें तो अप्रिय न बोलेंगे। वैसे भी हम जैसा जिसको देते हैं या जैसा कहते हैं, वह लौट कर हमारे पास ही आता है। इसलिए भगवान की आराधना करते वक्त भी हमें भगवान से अपना मन मिलाना चाहिए। आराधना करते वक्त मन भटकने से हम जीवन भर भटकते ही रहेंगे, पूजा का कोई फल हमें नहीं मिलेगा।


21 अप्रैल को होगा विशेष अनुष्ठान

विधान के समापन पर 21 अप्रैल को एक विशेष अनुष्ठान होगा। यह अनुष्ठान ज्योतिष के आधार पर 12 राशि, 27 नक्षत्र, 9 ग्रहों के आधार पर होगा। इस अवसर पर विशेष हवन और पूजन भी होगा।

इनका भी सहयोग रहा

कार्यक्रम में जयंतीलाल कोठरी, बाबूलाल सरिया, प्रकाश पंचोरी, महावीर मेदावत, दीपेश वेगरिया, आदेश घाटलिया, चंदमल राजावत, रमेश वेगरिया, पारसमल वेगरिया, सूरजमल पंचोरी, सूरजमल कड़वावत, संदीप वेगरिया, कुलदीप वेगरिया, मांगलीलाल वेगरिया, संजय वेगरिया रमेश पंचोरी आदि का भी सहयोग रहा।

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