प्रातः कालीन क्रीम क्लास में मुनिवर विहसंत सागर महाराज ने यह बताया कि तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में केवलज्ञान के दस अतिशय होते हैं, जो घातिकर्म के क्षय होने पर उत्पन्न होते हैं। पढ़िए यह रिपोर्ट…
डबरा। प्रातः कालीन क्रीम क्लास में मुनिवर विहसंत सागर महाराज ने यह बताया कि तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में केवलज्ञान के दस अतिशय होते हैं, जो घातिकर्म के क्षय होने पर उत्पन्न होते हैं। इनमें से पहला अतिशय चार सौ कोस में सुभीक्षता अर्थात् तीर्थंकर भगवान जहां विराजते हैं, वहां से चारों ओर चार सौ कोस प्रमाण क्षेत्र में सभी जीव संतुष्ट, सुखी, स्वस्थ और सम्पन्न हो जाते हैं।

हुए धार्मिक कार्यक्रम
आरोग्यमय वर्षा योग समिति द्वारा आचार्य विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करके बड़े ही भक्ति भाव से मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज की सभी भक्तों ने अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की। उसके पश्चात गुरुदेव ने भक्तामर की कक्षा में दसवें काव्य में बताया कि जैन दर्शन एक मात्र ऐसा दर्शन है, जो भक्त को भगवान बनाने की विधि सिखाता है। अन्य दर्शन तो सिर्फ भक्त को भक्त ही बने रहना सिखाता है। उन्होंने कहा कि हे जग भूषण ! प्राणियों के स्वामी! आपकी यथार्थ गुणों की भक्ति करने वाले इस पृथ्वी पर आप जैसे ही हो जाते हैं, इसमें कोई अचरज नहीं। सच्चा मालिक वही है, जो अपने आश्रित को स्वयं अपने जैसा बना लें। प्रवचन के उपरांत उमरी जिला भिंड से पधारे गुरु भक्त का मोमेंटो चंदन से सम्मान किया गया। प्रतिदिन बाहर से गुरु भक्त गुरु दर्शन के लिए आ रहे हैं। आज भी भिंड इटावा ग्वालियर से गुरु भक्त आए और श्री फल भेंट कर गुरुदेव से आशीर्वाद लिया।
ये हो रहे हैं कार्यक्रम
मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी मुनिराज एवं मुनि108 श्री विशवसामय सागर जी महाराज के पावन वर्षा योग में निम्न कार्यक्रम डबरा में चल रहे हैं…
प्रातः 6:30 बजे क्रीम क्लास
सुबह 8:30 बजे भक्तामर शिविर
सुबह10:00 बजे आहार चर्या
दोपहर 12:00 से 3:00 बजे तक सामयिक
दोपहर 3:30 बजे से स्वाध्याय
शाम 6:30 बजे से आनंद यात्रा एवं पुरस्कार वितरण एवं आरती
रात्रि 9:00 बजे से वैयावृत्ति
इस कार्यक्रम की आयोजक आरोग्यमय वर्षा योग समिति 2023 डबरा है और निवेदक सकल जैन समाज डबरा है।













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