पंचकल्याणक महोत्सव में तपकल्याणक के दिन कई कार्यक्रम और धार्मिक क्रियाएं हुईं। मुनि श्री सुधासागर महाराज ने भी धर्मसभा में प्रवचन दिए। पढ़िए राजीव सिंघाई की विस्तृत रिपोर्ट…
पृथ्वीपुर (मप्र)। पंचकल्याणक महोत्सव में तपकल्याणक के दिन नाभिराय का दरबार, युवराज आदिकुमार का विवाह, आदिकुमार का राज्याभिषेक, 32000 मुकुटबद्ध द्वारा संचालन, षट्कर्म शिक्षा, ब्राह्मी सुंदरी विद्यादान, आदि संसारिक व्यवस्था, नीलाजंना नृत्य, आदिकुमार का वैराग्य, लोकातिक देवों का आगमन, आदिकुमार का पुत्र भरत बाहुबली को राज्य सौंपना, सुदर्शन नायक पालकी का आरूण होकर प्रस्थान, दीक्षावन की ओर प्रस्थान, अकन्यास संस्कार रोपण पूजन की क्रियाएं और प्रस्तुति की गईं।
जागृत होकर अपने बल पर जीएं
इस अवसर पर जगतपूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि हम भगवान के बल पर नहीं, हम अपने बल पर जीएं। हम उदासीन होकर न जीएं, मदहोश होकर न जीएं, हम जागृत होकर जीएं, हम अपने बल पर जीएं। जो करेंगे, अपने बल पर करें। जो भगवान के सहारे, दुनिया के बल, भाग्य के भरोसे जिया, वो सबसे बड़ा अभागा है। जो अपनी दम पर जीता है, उसे दुनिया के सहारे की जरूरत नहीं रहती। किस्मत की कठपुतली मत बनना, उस किस्मत से कहना कि हे किस्मत तू मुझे क्या रुलायेगी, अपनी किस्मत मैंने खुद लिखी है। जब तुम्हारे मन में ये भाव आए कि मैंने जिंदगी बहुत जी ली, अब मैं किसी के लिए जीना चाहता हूं, मैंने सुख बहुत पा लिया, अब मैं किसी को सुख देना चाहता हूं, उस दिन तुम पिता बनने का भाव करना। मैं धर्म के खातिर नहीं, बेटे की खातिर सारी बुराइयां छोड़ना चाहता हूं। इसी का नाम सच्चा बाप है।

अच्छे नेता कस्तूरी की तरह
मेरी बुद्धि बहुत अच्छी है, मैंने अपने लिए बहुत कुछ कर लिया, अब मैं दुनिया के लिए करना चाहता हूं, तब तुम नेता बनने का भाव करना। खरीदकर हाथ जोड़कर, बोतलें बांटकर नेता मत बनो। अच्छे नेता कस्तूरी की तरह होते हैं। लोग उन्हें अपने आप ढूंढ लेते हैं। तुम वोट मांगना नहीं है। लोग तुम्हें अपने आप वोट देंगे। मेरा समय प्रजा का होगा, जीऊंगा तो देश के लिए जीऊंगा, मरूंगा तो देश के लिए तभी तुम नेता बनना। उन्होंने कहा कि अपने बाप से सम्पत्ति और मां से कभी रोटी मत मांगना, चाह भी मत करना, छीनना भी मत। नहीं तो ये बददुआएं एक दिन तुम्हें सड़क पर लाकर रख देंगी। भले ही मजदूरी कर लेना, छोटा सा धंधा कर लेना लेकिन चाहना भी नहीं, मांगना भी नहीं, छीनना भी नहीं। तुम्हें बाप बनने का तभी अधिकार है, जब तुम्हारे अंदर भाव आये कि बेटा मांग नहीं पाए, उससे पहले मैं उसे अपनी सम्पत्ति दे दूंगा। बिना मांगे जो वस्तु मिलती है, वो वस्तु भीख नहीं, भेंट कहलाती है। कार्यक्रम में गुरुदेव के पड़गाहन एवं उन्हें आहारदान देने का सौभाग्य शुभम जैन हैप्पी, राहुल, दीपचंद्र जैन को प्राप्त हुआ।













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