पर्युषण पर्व के उपलक्ष में चल रहे शिविर में दिगंबर जैन दशा नरसिंह पूरा समाज के भट्टारक यश कीर्ति गुरुकुल सभागार में आज चौथे दिन राजकीय अतिथि गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी के सानिध्य में उत्तम शौच पर्व मनाया गया। श्री दिगम्बर जैन समाज के धर्म मंत्री मुकेश गांधी ने बताया कि गुरुकुल प्रांगण में चल रहे दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर में शिविरार्थियों ने श्रद्धा पूर्वक संगीतकार उमेश जैन के भक्तिमय माहौल में पूजा एवं अर्चना एवं महा शांतिधारा की और परिवार के सुख की कामना की। पढ़िए सचिन गंगावत की विशेष रिपोर्ट
ऋषभदेव। पर्युषण पर्व के उपलक्ष में चल रहे शिविर में दिगंबर जैन दशा नरसिंह पूरा समाज के भट्टारक यश कीर्ति गुरुकुल सभागार में आज चौथे दिन राजकीय अतिथि गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी के सानिध्य में उत्तम शौच पर्व मनाया गया। श्री दिगम्बर जैन समाज के धर्म मंत्री मुकेश गांधी ने बताया कि गुरुकुल प्रांगण में चल रहे दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर में शिविरार्थियों ने श्रद्धा पूर्वक संगीतकार उमेश जैन के भक्तिमय माहौल में पूजा एवं अर्चना एवं महा शांतिधारा की और परिवार के सुख की कामना की। आज के राजा भरत चक्रवर्ती एवं महाशांतिधारा करने का सौभाग्य एवं सांयकालीन आरती का लाभ भी महावीर प्रसाद नोगामा परिवार को प्राप्त हुआ। श्री दिगंबर जैन तीर्थ रक्षा कमेटी के महामंत्री प्रद्युमन जी भवरा ने बताया कि सांयकाल में बड़े मंदिर जी में श्री दिगम्बर जैन समाज के द्वारा वेदी पर मंडप भरा जाता है, जिसमे जैन विद्यालय के अध्यक्ष दिलीप भानावत, आशीष टाटा, मनीष कोठारी, ऋषित बोहरा, अशोक किकावत आदि सदस्य उपस्थित थे। पुलक मंच के महामंत्री भानु गनोडिया ने बताया कि गुरुकुल सभागार में चल रहे शिविर में शिविरार्थियों ने भक्तिभाव से पूजा अर्चना की ।उसके पश्चात गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी महाराज को जिनवाणी और शास्त्र भेंट किया गया, जिसका सौभाग्य मुंबई निवासी सुरेश चंद रजनी पालिया को प्राप्त हुआ।
लोभ की पूर्ति असंभव
इस अवसर पर आचार्य श्री ने कहा कि उत्तम शौच का आज चौथा दिन है। क्रोध गया मान गया मायाचारी गई अब लोभ जाएगा। लोभ की तासीर बड़ी अलग है ज्यों ज्यों लाभ होता है, त्यों-त्यों लोभ बढ़ता है। लोभ की पूर्ति करना असम्भव है। वह कभी पूर्ण नहीं होता। गुरुदेव ने कहा कि चार कषाय क्रोध, मान, माया और लोभ हैं। क्रोध से ब्रेनहेमरेज, अकड़ के चलने से अटैक, मायाचारी करोगे तो पैरालिसिस और ज्यादा लोभ करोगे तो कोमा में चले जाओगे। चार कषाय करने से मन ही नहीं तन भी खराब होता है। जीवन में यदि आनंद हो तो आसपास कभी कषाय नहीं आएगा। जैसे भगवान की प्रतिमा हंसती है, वैसे जीवन में हंसते रहो। जनम जनम के हम बंजारे बस्ती बांध न पाएगी और अपना डेरा वहीं जमेगा जहां शाम हो जाएगी। संत जहां बैठ जाए वो कस्बा भी शहर हो जाता है। संत से मत पूछो ठिकाना उनके रहने का, जहां आसान जमा बैठे वही आशियाना हो जाता है। आज उत्तम शौच का पर्व है। मन को निर्मल बनाने का प्रयास करें। शिविर की कक्षाएं ठीक 4 बजे शुरू की गईं। 6,30 बजे भगवान की आरती की गई। जैन महिला मंडल की आभा जैन किकावत ने बताया कि सांयकालीन आरती के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम किया गया। जिसमें पारसनाथ भगवान पर कमठ का उपसर्ग दर्शाया गया। इसमें पंचकल्याणक के दृश्य भी दिखाए गए। इस अवसर पर तरुण क्रांति मंच, आदिनाथ एकता मंच समाज के वरिष्ठ सदस्य, नवयुवक मंडल के साथी महिला मंडल के सदस्य कई समाजजन मौजूद रहे।













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