भीलूडा। शांतिनाथ मंदिर में संत शिरोमणि आचार्य 108 विद्यासागर जी की समतापूर्वक समाधि होने पर विनयांजलि सभा का आयोजन किया गया। विनयांजलि देने से पूर्व शांतिनाथ विधान किया गया। इसके बाद चन्द्र सागरजी महाराज ने विद्यासागर जी गुरुदेव की जीवन शैली पर प्रकाश डाला और आचार्य के गुणों का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि वही होगी, जब हम उनके गुणों को अपने आचरण में लेंगे और जिन धर्म की प्रभावना करेंगे।
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