परम पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि 108 सुप्रभ सागर जी महाराज एवं मुनि 108 प्रणक सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में 27 नवंबर से 29 नवंबर तक भव्य नवीन वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव, जिनबिंब स्थापना समारोह का आयोजन श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पिपलोन, जिला आगर, मध्य प्रदेश में हर्षोल्लास के वातावरण में आयोजित किया रहा है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…
पीपलोन (आगर)। परम पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि 108 सुप्रभ सागर जी महाराज एवं मुनि 108 प्रणक सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में 27 नवंबर से 29 नवंबर तक भव्य नवीन वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव, जिनबिंब स्थापना समारोह का आयोजन श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पिपलोन, जिला आगर, मध्य प्रदेश में हर्षोल्लास के वातावरण में आयोजित किया रहा है। इस मौके पर प्रथम नित्य अभिषेक, विश्व शांति की मंगल कामना के लिए शांति धारा, नित्य नियम पूजन श्रद्धालुओं द्वारा भक्ति भाव से किया गया। इसके बाद विशाल घट यात्रा पिपलोन के प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर परिसर पहुंची, जहां पात्रों का चयन किया गया। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि एवं राजेश जैन दद्दू, मंदिर समिति के विशेष सहयोगी महेंद्र जैन बाकलीवाल ने बताया कि विधि-विधान की क्रियाएं अखिलेश शास्त्री द्वारा करवाई गईं। मंदिर परिसर बाबा के जयकारों से गूंज गया।संगीत के साथ पूजन अर्चन अंश जैन एंड पार्टी द्वारा संपन्न करवाया गया। मुनि श्री सुप्रभ सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन भी हुए। उसके बाद जाप्य अनुष्ठान की क्रिया की गई। शाम को मंगल आरती, सांस्कृतिक भजन संध्या का आयोजन भी किया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रदीप जैन बाकलीवाल, सचिव सुनील जैन, उपाध्याक्ष दिनेश जय गोधा ने बताया कि नित्य अभिषेक और शांति धारा के बाद याग मंडल विधान एवं श्री वास्तु विधान का आयोजन किया गया। मुनि श्री के मंगल प्रवचन भी हुए। सदस्य जिनेद्र जैन ने बताया कि दिन में मुनि श्री के द्वारा 3.30 बजे शंका समाधान भी किया गया। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि ने बताया कि यहां महावीर भगवान की अति प्राचीन चतुर्थ कालीन मनोहारी प्रतिमा विराजमान है। जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा- भक्ति से आस लेकर आता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। प्रत्येक अमावस व पूनम को यहां श्रद्धालु दर्शन, पूजन, वंदन करने आते हैं।














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