हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसके अन्तर्गत मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने युवा विद्वानों के ज्ञान को और प्रकाशित किया। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट…
आगरा। हरीपर्वत स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अमृत सुधा सभागार में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में तीन दिवसीय स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। इसके अन्तर्गत मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज ने युवा विद्वानों के ज्ञान को और प्रकाशित किया। अधिवेशन का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ किया, साथ ही बाहर से आए गुरु भक्तों ने संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया। तत्पश्चात सौभाग्यशाली भक्तों ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
भगवान जो कहते हैं, सही कहते हैं
इस अवसर पर मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जिनेंद्र भगवान ने कहा है, इसलिए सही नहीं है। जो सही है वह भगवान ने कहा है। इसलिए मैं भगवान को मानता हूं क्योंकि वह सही कहते हैं। जीव की एक विशेषता होती है। वो खुद जानना चाहता है क्योंकि जीव का स्वभाव जानना है। हमारे आचार्यों ने कहा कि जैसा भगवान ने कहा, वैसा मान लो, मान लेता हूं लेकिन अंदर से आता है थोड़ा जान भी लेना चाहिए। जैन दर्शन और दुनिया के दर्शनों में यही अंतर है। दुनिया के दर्शन में मात्र और मात्र मानना है, कुछ तुम्हें जानना नहीं है। जानना भगवान के खिलाफ खड़े होना है। जानने की बात सोचना भगवान पर संदेह करना है। अन्य दर्शन कहते हैं कि अपने अस्तित्व को खोकर सम्पूर्ण रूप से उस महासत्ता के आधीन हो जाना, उसमे मिल जाना नहीं, मिल जाना अलग चीज है। यहीं से हटकर जैन दर्शन कहता है भगवान को स्वीकार करने का यह अर्थ नहीं है कि भगवान के आधीन हो जाएं बल्कि भगवान की सत्ता को स्वीकार करने का अर्थ है कि हम स्वाधीन हो जाएं। अच्छे मार्ग पर चलने वाले कमजोर क्यों होते है। इसलिए जैनाचार्यों ने कहा कि तुम कमजोर रहो या बलजोर रहो, हम तुम्हें अपने अधीन नहीं करेंगे कि तुम हमारे अनुसार चलो। पहला दर्शन है जैन दर्शन, जिसमें भगवान ने कहा यदि तुम मुझे मानते हो और यदि तुम्हें कुछ भी जानने की इच्छा नहीं है तो तुम जैनी नहीं हो सकते। जैन दर्शन की विशेषता है तुम मानो भी लेकिन अपनी शक्ति के प्रमाण जानो भी। जैनदर्शन में भगवानों को लेकर ग्रंथों की संख्या बहुत कम है, जिसे हम प्रथमानुयोग कहते हैं लेकिन तीन अनुयोगों में क्या है सृष्टि का स्वरूप तुम जानो। भगवान आपने तो जान लिया, नहीं, मेरे जानने से नहीं होगा तुम जानो। तीनों अनुयोगों का विषय हमारे ज्ञान गम्य नहीं है। प्रथमानुयोग का विषय हमारे ज्ञान का विषय है। हमें पता नहीं रत्नत्रय लेश्याएं, आत्मा क्या होती है, ये हमारे ज्ञान का विषय नहीं, हमें देखने में ही नहीं आ रहा। तिरेसठ सलाका पुरुष तो देखने में आ रहे हैं। जो हमारे ज्ञान का विषय नहीं है तो उसे हम क्यों जाने। सीधे कह दो कि भगवान ये सब विषय आपके हैं, आप प्रत्यक्ष देख रहे हैं,जान रहे हैं, हम आपको स्वीकार करते हैं, आपको मानते हैं। महावीर स्वामी कहते है नहीं, जो वस्तु तुम्हारे ज्ञान के प्रत्यक्ष नहीं है, उसे अनुमान से जानो, लक्षण से जनो, शब्द से जानो, नय से जानो, मत से जानो। तुम्हारे ज्ञान का विषय नहीं है तो भी जानो, पढ़ो। क्यों पढ़ूं, समय खराब करूं। बोले नहीं तुम्हें पढ़ना है। भगवान ने कहा, सो सत्य नहीं। तुम्हें ये घोषणा करनी है कि मैं दावा करता हूं जो सत्य है वही भगवान ने कहा है। भगवान को अपनी आस्था में रखो, श्रद्धा में रखो, अपने मन के संदेह मिटाने के लिए रखो, स्वयं को जब तत्व में संदेह हो जाए तो कहना- नहीं, भगवान ने कहा है लेकिन जब सामने वाला आए तो ये तत्व नहीं रखना कि भगवान ने कहा है, तुम ये रखना यही सत्य है। पंचास्तिकाय ग्रन्थ को पूज्यवर ने इसलिए लिखा कि तुम खुद स्वाध्याय करो तुम समझो सृष्टि को, भगवान ने कह दिया है तो चुपचाप मत बैठो तुम खुद समझो ज्ञान में। जो ज्ञानी होकर पढ़ सकता है, समझ सकता है, तर्क- वितर्क जान सकता है और वो स्वाध्याय नहीं करता है। ये सबसे बड़ा निन्हव है। अधिवेशन का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया|।
जैन समाज रहा मौजूद
स्नातक परिषद अधिवेशन एवं युवा परिषद संगोष्ठी का समापन 28 अक्टूबर को होगा। तीन दिवसीय अधिवेशन से पूरे भारतवर्ष को पता चलेगा कि ज्ञान के मंथन के लिए होता है स्नातक सम्मेलन। इस धर्मसभा में प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठ्या, मनोज जैन बाकलीवाल, नीरज जैन जिनवाणी, पन्नालाल बैनाड़ा, हीरालाल बैनाड़ा, जगदीश प्रसाद जैन, राजेश सेठी, अमित जैन बॉबी, राजेश जैन गया वाले, विवेक बैनाड़ा, शैलेंद्र जैन, अनिल जैन, नरेश जैन, दिलीप जैन, अंकेश जैन, मीडिया प्रभारी,शुभम जैन, राहुल जैन सहित आगरा सकल दिगंबर जैन समाज के लोग बडी़ संख्या में मौजूद रहे।













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