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जो छोड़ते हैं वे निडर होकर घूमते हैं : मुनि श्री विध्रुव सागर जी ने कहा-हम सभी में भगवान बनने की सामर्थ्य है


एक दिगम्बर जैन साधु सबकुछ छोड़कर निर्भय होकर विचरण करते हैं। पूर्वाचार्यों ने कहा है कि जोड़ने की अभिलाषा ही दुःख का कारण है। यह विचार मुनि श्री विध्रुव सागर जी महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर समर्थ सिटी में व्यक्त किए। इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर…


इंदौर। संसारी प्राणी हर दम धन, सम्पत्ति, गाड़ी, बंगला आदि आदि जोड़ने के चक्कर में रहते हैं और फिर जो जोड़कर उसकी सुरक्षा के लिए हमेशा भयभीत होकर जीतें हैं। इसके विपरित एक दिगम्बर जैन साधु सब कुछ छोड़ कर निर्भय होकर विचरण करते हैं। अतः पूर्वाचार्यों ने कहा है कि जोड़ने की अभिलाषा ही दुःख का कारण है। यह विचार मुनि श्री विध्रुव सागर जी महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर समर्थ सिटी में व्यक्त किए। वे मंगलवार दोपहर को गांधी नगर से समर्थ सिटी पधारे हैं। विहार में गांधी नगर और समर्थ सिटी के समाजज उपस्थित रहे। मुनि श्री ने धर्मसभा में आगे कहा कि हम सभी में भगवान बनने की सामर्थ्य है, परन्तु हम अपनी समर्थ शक्ति को विपरीत दिशा में उपयोग करके संसार में परिभ्रमण करते रहते हैं। अनंतकाल के परिभ्रमण के बाद यह अनमोल मानव जीवन मिला है इसका सदुपयोग करना चाहिए। यही इस जीवन की सार्थकता है।

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