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पर्युषण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म पर्व मनाया गया : अगर मन में अहंकार है तो जीवन बेकार है


श्री दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाया गया, जिसमें कुंडलपुर से आई पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज की परम शिष्या गुणमाला दीदी ओर चंदा दीदी के सान्निध्य एवं नेतृत्व में भव्यातिभव्य श्री जी की आराधना की गई। पढ़िए राजकुमार जैन, नवीन अजमेरा की रिपोर्ट…


झुमरीतिलैया। श्री दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाया गया, जिसमें कुंडलपुर से आई पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज की परम शिष्या गुणमाला दीदी ओर चंदा दीदी के सान्निध्य एवं नेतृत्व में भव्यातिभव्य श्री जी की आराधना की गई। नया मंदिर जी में प्रथम अभिषेक एवं शांतिधाराका सौभाग्य बिमल-विकाश सेठी को एवं बड़ा मंदिर जी के मूल वेदी में प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य राकेश-आदित्य जैन छाबडा को और 1008 चन्द्रप्रभु भगवान का श्री विहार और पाण्डुकशिला पर प्रथम अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य अनिल-सिद्धार्थ जैन ठोल्या और दूसरी वेदी पर 1008 आदिनाथ भगवान की वेदी में प्रथम अभिषेक ओर शांतिधारा का सौभाग्य सुरेन्द-सौरभ जैन काला को मिला। इसी के साथ पुण्यार्जक परिवारों ललित-नीलम जैन सेठी की ओर से विभिन्न धार्मिक क्रियाओं को संपादित करते हुए अभूतपूर्व उत्साह के साथ विधान की पूजन करते हुए श्री जी के चरणों में अर्घ्य समर्पित किया।

इसके बाद दीदी ने मार्दव धर्म पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिस प्रकार बंजर भूमि या कंक्रीट भूमि में बीज बोने से फसल नहीं होती उसी प्रकार अगर मन में अहंकार है तो उनका जीवन बेकार है। इसके बाद समाज के सभी पदाधिकारी के साथ समाज के सैकड़ों लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।संध्या में भब्य आरती के साथ णमोकार चालीसा का पाठ ,दीदी द्वारा दस धर्मो का विवेचन हो रहा है इसके पश्चात सांस्कतिक कार्यक्रम में प्रथम दिन धार्मिक तम्बोला का कार्यक्रम हुए।

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