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जीवन में दो ही चीजें उपयोगी है समय और सांस: आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी ने धर्म देशना में समय और सांस की बताई अहमियत 


आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महामुनिराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ में वर्षायोग के लिए विराजमान हैं। उनके सानिध्य में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने बताया कि दोनों सीमित हैं क्योंकि जो फ्री है, वही सबसे ज्यादा कीमती है जैसे- हवा, पानी, नींद, समय, सांसे, मन की शांति और चेहरे की प्रसन्नता। कोडरमा से पढ़िए, जैन राजकुमार अजमेरा की यह खबर…


तरुणसागरम तीर्थ कोडरमा। आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महामुनिराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ में वर्षायोग के लिए विराजमान हैं। उनके सानिध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं। उसी श्रृंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने बताया कि दोनों सीमित हैं क्योंकि जो फ्री है, वही सबसे ज्यादा कीमती है जैसे- हवा, पानी, नींद, समय, सांसे, मन की शांति और चेहरे की प्रसन्नता। उन्होंने कहा कि मैं देख रहा हूं कि लोग अपने कल को अच्छा बनाने के लिए आज को गाली दे रहे हैं, आज का अपमान कर रहे हैं और आज को कोस रहे हैं। जो अपने वर्तमान को कोसते हैं और कहते हैं कि आज बहुत बुरा है। आप स्वयं सोचे कि हम अच्छे कल की इमारत बनाना चाहते हैं और आज की यानि वर्तमान की बुराइयां, निंदा तथा आलोचना की नींव खोद रहे हैं।

आचार्यश्री ने कहा कि जिसे हम कोस रहे हैं, ऐसे में भविष्य का निर्माण कैसे और कैसा होगा? जो आज को लेकर दुखी परेशान है। हमारा दिन, हफ्ता, महीना, साल सब खराब हो रहा है क्योंकि, हम लोगों की नजर में बेचारे हैं, बुरे वक्त में फंसे हुए हैं। कोई पूछता है कैसे हो भाई? हम कहते हैं क्या बताऊं बाबू? दिन काट रहे हैं ज़िन्दगी के।

हमारे पास वितृष्णा, असंतोष और गुस्सा के अलावा कुछ नहीं

उन्होंने कहा कि ध्यान रखना, कई वर्तमान मिलकर एक भविष्य का निर्माण करते हैं। भविष्य अचानक से उतर कर नहीं आता। भविष्य का निर्माण हमें रोज सकारात्मकता की सोच के साथ करना है और उसकी शुरुआत होती है मन की शांति से, चेहरे की प्रसन्नता और आत्म संतोष से। अगर हम लगातार अपने वर्तमान को कोसते हैं या नकारते हैं तो हम अपनी ऊर्जा को बहुत आगे बढ़ जाने के मार्ग को अविरुद्ध करते हैं। भविष्य की शुरुआत आज अभी इसी वक्त के दौर से होती है। जब हम अपने आज को ऐसे नकारात्मक माहौल से सजाते हैं तो हमारे पास वितृष्णा, असंतोष और गुस्सा के अलावा कुछ नहीं होता।

आज को धन्यवाद दो, शुक्रिया अदा करो

आपको आज से ही अपने अंदर कुछ ऐसा नया जुनून पैदा करना है, जो भविष्य की मंजिल की ओर ले जाए। जब सुख सौभाग्य, सौहार्द की शुरुआत होगी तो आज अभी इसी वक्त के दौर से ही होगी। आज को धन्यवाद दो, शुक्रिया अदा करो तो वह आपको अपने गले लगाएगा और भविष्य का निर्माण करेगा। इसलिए आज से आज को कोसना बंद करो और धन्यवाद देना शुरू करो। फिर देखो आज का चमत्कार।

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