अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्र मंडल विधान के तीसरे दिन सिद्धों की आराधना करते हुए 32 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए। इस अवसर पर मुनि श्री के प्रवचन भी हुए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
इंदौर। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर महाराज और क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य में नेमिनगर जैन कॉलोनी में नौ दिवसीय सिद्धचक्र मंडल विधान के तीसरे दिन मंगलवार को धर्म सभा को संबोधित करते हुए अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि सिद्धों की आराधना करते समय मन में राग- द्वेष, कषाय, ईर्ष्या का भाव नहीं होना चाहिए।
आचार्य भगवंतों ने कहा है कि सिद्ध की आराधना तो हमें निर्मल बना देती है।
भावों की पवित्रता ही आप को सिद्धत्व की यात्रा करवाती है।
उन्होंने कहा कि मतिज्ञान आदि तो कम- ज्यादा होने वाला है पर केवलज्ञान और सिद्धों का ज्ञान ही शुद्ध ज्ञान है।
उसी की प्राप्ति के लिए हम सिद्धचक्र विधान कर रहे हैं।
32 अर्घ्य किए गए समर्पित
इससे पहले मंगलवार को सिद्धों की आराधना करते हुए 32 अर्घ्य मंडल पर समर्पित किए गए।
भगवान पर शांतिधारा करने का लाभ पवन जैन गुनावाले को प्राप्त हुआ। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का लाभ सुदर्शन जटाले को प्राप्त हुआ।
शास्त्र भेंट महिला मंडल द्वारा किया गया।
आभार अध्यक्ष कैलाश लुधियाना ने व्यक्त किया और संचालन गिरीश पटौदी ने किया।














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