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मंझार जैन मंदिर में प्रवचन दे रहे हैं मुनि श्री : स्वाधीन बनने से होगा आत्मा का कल्याण – सुधासागर जी महाराज


मंझार जैन मंदिर में मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज विगत एक माह से विराजमान हैं। अपने प्रवचन में मुनिश्री ने कहा कि महानुभाव पराधीन नहीं बनो। स्वाधीन बनो यही हमारी आत्मा का कल्याण करने वाला होगा। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…


टीकमगढ़। शहर के मध्य में स्थित मंझार जैन मंदिर में मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज, क्षुल्लक गंभीर सागर जी महाराज विगत एक माह से विराजमान हैं। उनके सानिध्य में धर्म की गंगा बह रही है। हजारों लोग धर्म लाभ ले रहे हैं। मुनि श्री के सानिध्य में श्री 1008 पारसनाथ धाम पंचायती मंदिर का शिलान्यास संपन्न हो चुका है। तीन मंजिला मंदिर का पाषाण से निर्माण होगा। मंदिर में पाषाण से निर्मित चौबीसी भी बनाई जाएगी। सोमवार को प्रातः 8:30 मुनि श्री मंच पर विराजमान हुए।

अपनी जिंदगी की डोर अपने हाथ में

मुनि श्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट के बाद मुनि श्री के प्रवचन शुरू हुए। उन्होंने अपने प्रवचनों के माध्यम से कहा कि हर व्यक्ति यह चाहता है कि मेरे अंदर ऐसी शक्ति सामर्थ्य जाग जाए कि मुझे किसी के अधीन ना होना पड़े। मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों को स्वाधीन बनना है किसी के पराधीन होकर अपना जीवन नहीं खपाना है। श्रेष्ठतम व्यक्ति वह नहीं है जिसके साथ दुनिया है। जिसके साथ जितने लोग हैं समझ लेना वह व्यक्ति उतना कमजोर है।

किसी भी तरफ से देखो, जितने ज्यादा लोग उसके आगे पीछे होंगे, समझ लेना यह कमजोर व्यक्ति की निशानी है। और यह बहुत बड़ी कमजोरी भी है।

मुनि श्री ने कहा कि जैसे राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च पद वाला व्यक्ति होता है। उनकी सुरक्षा दूसरों के हाथ में होती है। वह अपनी सुरक्षा स्वयं नहीं कर सकते। तुम श्रावक लोग तो लाइसेंसी लेकर बंदूक रख सकते हो, राइफल रख सकते हो, डंडा भी अपनी सुरक्षा के लिए ले सकते हो। लेकिन राष्ट्रपति तो कोई लाइसेंसी बंदूक भी नहीं रख सकते। यानी अपनी जान बचाने के लिए भी अधिकार नहीं है। उनकी जान तो पुलिस वाले बचाएंगे, उनका प्रोटोकॉल बचाएगा। उनकी सुरक्षा में लगे सैनिक बचाएंगे। यह कहां तक सुरक्षित है। यह विचारणीय विषय है कि हम विचार करते हैं वह बड़ा आदमी है, इनके पास कितनी सुरक्षा है कितना बड़ा प्रोटोकॉल होगा। मुनि श्री ने कहा कि साइकिल चलाने वाले की जिंदगी स्वयं इसके हाथ में होती है लेकिन करोड़ों की कीमत वाली गाड़ी में बैठने वाली की जिंदगी दूसरों के हाथ में होती है। वह मालिक तो करोड़ों की गाड़ी का है लेकिन उसकी जिंदगी ड्राइवर के हाथ में होती है। मुनि श्री ने कहा कि भौतिकवाद की चकाचौंध तुम्हें पराधीन बनाती है और धर्म हमें स्वाधीन बनाता है।मुनिश्री ने कहा कि महानुभाव पराधीन नहीं बनो। स्वाधीन बनो यही हमारी आत्मा का कल्याण करने वाला होगा।

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