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उत्तम आर्जव धर्म पर हुई धर्म प्रभावना : आर्जव धर्म के धारण करने से ही हो सकता है जीव का कल्याण


श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा पंचायती मंदिर में दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन मंगलवार को उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। भक्तों ने महापर्व के तीसरे दिन भगवान पारसनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की। दशलक्षण पूजन, उत्तम आर्जव धर्म की पूजन विधानाचार्य सिद्धम जैन शास्त्री के सानिध्य में सम्पन्न हुई। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट…


आगरा। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा पंचायती मंदिर में दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन मंगलवार को उत्तम आर्जव धर्म के रूप में मनाया गया। भक्तों ने महापर्व के तीसरे दिन भगवान पारसनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा की। दशलक्षण पूजन, उत्तम आर्जव धर्म की पूजन विधानाचार्य सिद्धम जैन शास्त्री के सानिध्य में सम्पन्न हुई। विधानाचार्य सिद्धम जैन शास्त्री ने भक्तों को उत्तम आर्जव धर्म के महत्व को बताते हुए कहा कि सरल स्वभावी बनो भगवान महावीर कहते हैं कि जिसके मन वचन और कर्म एक जैसे होते हैं, वह महात्मा है।

जिसके मन में कुछ है वचन में कुछ और कार्य में कुछ है वह दुरात्मा है। हमें मायाचारी नहीं करना, छल कपट नहीं करना,धोखा नहीं देना विश्वासघात नहीं करना, आर्जव धर्म यही प्रेरणा दे रहा है। इस आर्जव धर्म के धारण करने से ही जीव का कल्याण हो सकता है। जैसे सर्प का स्वभाव टेढ़ा चलने का है परंतु जब वह बिल में जाता है, तो सीधा हो जाता है। इसी प्रकार इस संसार में हम भले ही मायाचार करके छल करके तिरछे चलते हैं,परंतु हमें सिद्धालय में पहुंचना है तो हमें सरल बनना ही पड़ेगा।

जिस प्रकार एक सीधी म्यान में टेढ़ी तलवार नहीं समा सकती उसी प्रकार वक्र हृदय वाले व्यक्ति में आर्जव धर्म में समा नहीं सकता। इस अवसर पर संजयबाबू जैन,संजय जैन, विजय कुमार जैन, योगेश जैन, पारसबाबू जैन, श्याम सुंदर जैन सहित समस्त ताजगंज जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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