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ध्वजारोहण कर कलश स्थापना की : मंगल कलश स्थापना में प्रदेश भर से पधारे श्रद्धालु 


आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। टोंक से पढ़िए, विकास जैन की यह खबर…


टोंक। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में ध्वजारोहण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ हुआ। धर्म उपदेश के पूर्व आदिनाथ भगवान एवं आचार्य शांति सागर जी सहित सभी आचार्यों के चित्रों के सम्मुख दीप प्रवज्जलन स्व बाबूलाल जी सेठिया परिवार नैनवा द्वारा किया गया। इसके पश्चात पूर्वाचार्यों को अर्घ्य समर्पण किया गया। एवं आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन एवं पूजन किया गया। ध्वजारोहण के पुण्यार्जक परिवार श्रेष्ठी टीकमचंद, श्याम लाल, धर्मचंद, भागचंद, उत्तमचंद फूलेता वाले परिवार ने किया।

उदार भावना से किया धार्मिक कार्य सफल होता है

आचार्य श्री ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में सुख, शांति धर्म में वृद्धि के लिए ध्वजारोहण किया जाता है। भावना भव जन्म मरण के आवागमन को नष्ट करती है। सरल ,सहज और उदार भावना के साथ किया गया धार्मिक कार्य सफल होता है। धर्म और अर्थ के प्रति उदारता अच्छी है ,धर्म की उदारता से अर्थ का उपार्जन होता है। धर्म धारण करने से प्रतिकूलता अनुकूलता में बदल जाती है, क्योंकि धार्मिक कार्य से पुण्य का अर्जन होता है। और प्रतिकूलता पाप कर्मों के कारण होती है आगम जिनवाणी में इसका उपाय बताया है कि धर्म धारण करने से प्रतिकूलता को अनुकूलता में बदला जाता है। चातुर्मास में अनेक पर्व आते हैं गुरु पूर्णिमा, वीर शासन जयंती दशलक्षण पर्व आत्मा की विशुद्धता के लिए होते हैं गुरु पूर्णिमा के पूर्व आचार्य श्री ने दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज को स्मरण कर उनके गुणानुवाद किया। जिनालय में दर्शन अभिषेक पूजन से जीवन का निर्माण होता है। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ने 57 वें वर्षायोग स्थापना के पूर्व आयोजित ध्वजारोहण के पश्चात धर्म सभा में प्रकट की। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने कहा कि वर्षायोग में श्रावकों को साधुओं की धार्मिक क्रियाओं की अनुकूलता के लिए कार्य करना चाहिए। समय का उपयोग कर वर्षायोग में साधुओ द्वारा धर्म की वर्षा की जाती है इससे जीवन में बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।

कलश स्थापना के सौभाग्यशाली ये रहे

चातुर्मास समिति मीडिया प्रभारी रमेश काला प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि प्रथम कलश आचार्य श्री वर्धमान सागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी पारस चंद,सुरेन्द्र कुमार,नरेंद्र कुमार,अंशुल कुमार, आरव,अंश, आशी, रीति छामुनिया परिवार को मिला। द्वितीय कलश आचार्य शांतिसागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी प्रहलाद चंद , विमल चंद, कमल कुमार , चेतन कुमार, अंकित कुमार अंश आंडरा परिवार को मिला। तृतीय मंगल कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी मदन लाल, मिट्ठू लाल , महावीर प्रसाद , ज्ञानचंद,सन्मति कुमार जी दाखिया परिवार को प्राप्त हुआ। चतुर्थ कलश आचार्य शिव सागर कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी राधा देवी, सौरभ कुमार , जंबू कुमार, टोनी कुमार आंडरा परिवार को मिला। पंचम कलश आचार्य धर्मसागर जी कलश का सौभाग्य श्रेष्ठी मोहन लाल, पदम चंद , ज्ञानचंद, मनोज कुमार, कमल कुमार छामुनिया परिवार को मिला। षष्ठम कलश आचार्य अजीत सागर कलश का सौभाग्य महावीर प्रसाद, धर्मेंद्र कुमार, जितेंद्र कुमार, अविकांश कुमार पासरोटियां परिवार को मिला। चातुर्मास सर्वोषधि प्रहलाद चंद, विमल कुमार, कमल कुमार, अनिल कुमार, चेतन कुमार, सुनील, दिव्यांश आंडरा परिवार को मिला। वस्त्र भेंट राजेंद्र कुमार, शैलेश कुमार गोयल परिवार को प्राप्त हुआ। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य बाबूलाल, नरेंद्र कुमार, राजेंद्र कुमार, मुकेश कुमार, ओमप्रकाश, कुशाल ककोड़ वाले परिवार को मिला। शास्त्र भेंट का सौभाग्य महावीर प्रसाद, धर्मचंद, सुमित कुमार, रवि कुमार दाखिया परिवार को प्राप्त हुआ।

यह समाजजन रहे मौजूद

इस मौके पर चतुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सराफ, धर्मेंद्र पासरोटियां, कमल सराफ, राजेश बोरदा, रमेश सायवाड, पप्पू नमक,टोनी आंडरा, चेतन आंडरा, डॉ चेतन, हिमांशु पासरोटियां, हेमराज नमक निवाई, सुरेन्द्र छामुनिया, ज्ञानचंद छामुनिया, किन्नी शिवाड़िया, अर्पित पासरोटियां, मनीष अतार, राहुल पासरोटियां, पुनीत जागीरदार, दिनेश छामुनिया, बेनी प्रसाद कल्ली, अमित छामुनिया आदि मौजूद थे ।

यहां से भी आए श्रद्धालुजन

इस ऐतिहासिक अवसर पर हजारों श्रद्धालु जयपुर, किशनगढ़, कोटा, निवाई, लावा, डिग्गी, टोडा, देवली, पिपलु, उनियारा, इचलकरंजी, पारसोला, धरियावद, सनावद, जोबनेर, इंदौर, सूरत, नैनवा, सांगानेर, अजमेर, कर्नाटक, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत, गोहाटी, सलूंबर, सहित अनेक स्थानों से उपस्थित रहे

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