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कमलासन वेदी पर जिन प्रतिमा स्थापना हुई : विश्व शान्ति महायज्ञ की पूर्णाहूति के साथ वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव सम्पन्न


स्थानीय श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन नया मन्दिर में सकल दिगम्बर जैन समाज सागवाडा की ओर से आज्ञासागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में व प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया एवं प्रतिष्ठाचार्य अरविन्द जैन के तत्वावधान मे आयोजित तीन दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव मंगलवार को जिन बिम्ब स्थापना एवं विश्व शान्ति महायज्ञ की पूर्णाहूति के साथ सम्पन्न हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


सागवाड़ा। स्थानीय श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन नया मन्दिर में सकल दिगम्बर जैन समाज सागवाडा की ओर से आज्ञासागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में व प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया एवं प्रतिष्ठाचार्य अरविन्द जैन के तत्वावधान मे आयोजित तीन दिवसीय वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव मंगलवार को जिन बिम्ब स्थापना एवं विश्व शान्ति महायज्ञ की पूर्णाहूति के साथ सम्पन्न हुआ। महोत्सव के समापन अवसर पर मंगलवार को प्रातः मूलनायक आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक सौधर्म ईन्द्र कीर्ति कुमार शाह व इन्द्र इन्द्राणी समूह द्वारा किया गया।

इसके बाद आज्ञासागरजी महाराज के मंत्रोच्चारण के साथ मूलनायक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर शांतिधारा कलपेश जयन्तिलाल बोबडा एवं पाण्डुक शिला पर विराजित आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर शांतिधारा प्राशु नरेन्द्रजी शाह परिवार द्वारा की गयी। साथ ही आज्ञा सागरजी महाराज का पाद प्रक्षालन साधना रिनेश कोठारी परिवार द्वारा किया गया। मुनि श्री को धनपाल भूता आतरी परिवार द्वारा जिनवाणी भेंट की गयी। वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत मन्दिर के गर्भगृह मे मूलनायक आदिनाथ भगवान के दायी ओर चन्द्रप्रभु भगवान की प्रतिमा नूतन कमलासन वेदी पर भूरी देवी रतन लाल खोडनिया परिवार द्वारा व बायी ओर पदमप्रभु भगवान की प्रतिमा केप्टन छगनलाल संघवी परिवार द्वारा प्रतिष्ठाचार्य के मंत्रोच्चारण के साथ विराजमान की गयी।

साथ ही जिनेन्द्र भगवान के यक्ष व यक्षिणी की प्रतिमाओं को सभा मडंप मे विराजित किया गया। इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए आज्ञासागरजी महाराज ने कहा कि हमें अपने आचार विचार के साथ भाषा में भी सुधार करना चाहिए। हमारी भाषा ही हमारे व्यक्तित्व का प्रतिरूप होती है भाषा ही मन के भावों को प्रकट करती है। कोई व्यक्ति स्वतः ही मन्दिर जाता है तथा किसी को मन्दिर भेजना पड़ता है। यहीं भावों का अन्तर पड़ता है। मुनि श्री ने कहा की धन की तीन गति निश्चित है पहला दान दूसरा भोग और यह दोनों नहीं किये तो तीसरी गति विनाश निश्चित है।

विश्व शांति कामनार्थ सर्व शान्ति महायज्ञ के तहत 21 हवन कुण्ड में मंत्रोच्चारण के साथ घी व घूप की आहूति के साथ श्रीफल की पूर्णाहूति की गयी। कार्यक्रम के अन्त में शांतिपाठ,आरती, विसर्जन विधि की गयी। दिनेश खोड़निया परिवार द्वारा स्वामी वात्सल्य का आयोजन हुआ।

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