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जैनेतर बंधुओं ने भी की भावपूर्ण अगवानी : भीषण गर्मी में संतों का हुआ मंगल प्रवेश 


साधु परमेष्ठि का नगर में प्रवेश जैन धर्म में अत्यंत पावन और पुण्यदायी अवसर माना जाता है। इसी पुण्य अवसर पर नगर में चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का महाराष्ट्र चातुर्मास के पश्चात 26 साधुओं के विशाल संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


बैडिया। साधु परमेष्ठि का नगर में प्रवेश जैन धर्म में अत्यंत पावन और पुण्यदायी अवसर माना जाता है। इसी पुण्य अवसर पर नगर में चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का महाराष्ट्र चातुर्मास के पश्चात 26 साधुओं के विशाल संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ।

नगरवासियों के लिए और भी हर्ष का विषय रहा कि मुनिश्री विवर्धन सागर जी महाराज के संघ के 27 साधु परमेष्ठि भी प्रातः बेला में नगर में मंगल प्रवेश हेतु पधारे। समाज अध्यक्ष पंकज जटाले एवं सचिव अजय शाह ने बताया कि इतने बड़े संत संघ के आगमन पर नगर का माहौल आध्यात्मिक उल्लास से भर गया।

पलक पांवड़े बिछाकर संतों की अगवानी

गुरुवर के नगर आगमन पर समाजजन और जैनेतर बंधु पलक पांवड़े बिछाकर भव्य स्वागत के लिए एकत्रित हुए। नगर में जगह-जगह तोरण द्वार सजाए गए थे, तथा धर्म ध्वजाओं से नगर को सजाकर एक तीर्थमयी रूप प्रदान किया गया था। बैंड-बाजों की मधुर ध्वनि, पुष्पवर्षा और श्रद्धाभाव के संग गुरुवर का स्वागत किया गया।

समोशरण का दृश्य

इतनी अधिक संख्या में साधु-संतों के एक साथ नगर में पदार्पण से नगर का वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वर्ग से साक्षात समवसरण उतर आया हो। भक्तगण भावविभोर होकर गुरुवर के पाद प्रक्षालन और मंगल आरती में भाग लेकर आशीर्वाद प्राप्त करते दिखे।

भीषण गर्मी भी नहीं रोक सकी तपस्वियों के चरण

जहाँ एक ओर आमजन भीषण गर्मी में घरों से निकलने में संकोच करते हैं, वहीं दूसरी ओर ये तपस्वी साधु-संत, सूर्य देव के रोद्र रूप के बीच, धर्म प्रसार हेतु पद विहार कर नगर पहुंचे — यह अपने आप में एक अनुपम उदाहरण है।

इस मंगल अवसर पर समाजजनों की भारी उपस्थिति एवं जैनेतर समुदाय की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि धर्म, त्याग और तपस्या की शक्ति सीमाओं से परे होती है।

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