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संगठन की शक्ति से समाज की उन्नति और संपन्नता : जिन शासन एकता संघ के संभागीय सम्मेलन में समाजजनों की सहभागिता सराहनीय   


नगर में जिन शासन एकता संघ के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद जिले की सीमा पर स्थित तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में क्षेत्रीय सम्मेलन किया गया। इसकी अध्यक्षता दिल्ली पुलिस के पूर्व डीजीपी शांतकुमार ने की। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर…


अशोक नगर। नगर में जिन शासन एकता संघ के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद जिले की सीमा पर स्थित तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में क्षेत्रीय सम्मेलन किया गया। इसकी अध्यक्षता दिल्ली पुलिस के पूर्व डीजीपी शांतकुमार ने की। सम्मेलन में अशोकनगर मुंगावली, शाढ़ौरा, पिपरई, चंदेरी, ईसागढ़, कदवया सहित पूरे जिले से एकता संघ के कार्यवाहक विपिन सिंघई जैन, समाज महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री विजय धुर्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। सम्मेलन में गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, सागर ललितपुर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। जिला सम्मेलन में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में एकता को जीवन का मूलमंत्र बताते हुए कहा कि एकता ही बल है। परमार्थ हो या संसार, हर क्षेत्र में एकता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री की भावना थी कि ये देश भरत का भारत बने। उन्हीं की भावनाओं के अनुरूप यह संघ बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन्मे भी एकता संघ, मरे भी एकता संघ, यह शगुन बने, मंगल बने और जीवन का अभिन्न अंग बने।

यदि सत्य नहीं बोल सकते तो मौन रहो

मुनिश्री ने कहा कि अपने आप को सोना बना लो, संसार का कीचड़ तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। गंदगी हटाने में समय खराब मत करो, अपने बचाव पर ध्यान दो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैन धर्म हिंसा का मार्ग नहीं सिखाता, बल्कि आत्मरक्षा और आत्मशुद्धि का संदेश देता है। अपने घर से शुरुआत करो, मन-वचन-काय को एक करो। मन में कुछ और वचन में कुछ ऐसी मायाचारी नहीं होनी चाहिए। यदि सत्य नहीं बोल सकते तो मौन रहो, लेकिन झूठ मत बोलो। मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि “मां, पिता और पुत्रकृयदि इनका संगठन एक हो जाए तो वह भी शक्ति बन जाता है। मन, वचन और काय, इन तीन में से यदि दो भी एक हो जाएं तो व्यक्ति शक्तिमान बन जाता है। उन्होंने कहा कि परमार्थ के लिए भी संगठन आवश्यक है। जब तक मन-वचन-काय एक नहीं होंगे, तब तक सिद्धि प्रकट नहीं होगी। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र, जब तक अभेद नहीं होंगे तब तक मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं।

रत्नत्रय की वंदना करें 

जिन शासन एकता संघ की सभा शुरू होने के पहले रत्नत्रय की वंदना करें। मुनिश्री ने रत्नत्रय की वंदना का भाव समझाते हुए कहा कि वंदे सम्यक दर्शनम, सबसे पहले हाथ जोड़ें, वंदे सम्यक ज्ञानम, हाथ जोड़ते हुए गर्दन झुकाएं, वंदे सम्यक चारित्रम, हाथ जोड़ते हुए, गर्दन झूकाएं बस हो गया, इस तरह से कर सकते हैं।

जैन समाज कि आबादी घट रही है सावधान रहें- पूर्व डीजीपी

सम्मेलन में उपस्थित पूर्व डीजीपी एसके जैन ने समाज को चेताते हुए कहा कि जागो, चेतो। जैन समाज की बर्बादी का एक बड़ा कारण अधिक उम्र में विवाह है। 21 वर्ष के बाद बच्चों के विवाह को लेकर गंभीर होना चाहिए। उन्होंने जनगणना में उपजाति के स्थान पर ‘जैन’ लिखने की अपील की। साथ ही कहा कि जैन समाज भाषाई रूप से समृद्ध है। प्रत्येक जैन को कम से कम चार भाषाओं का ज्ञान होता है। संस्कृत और प्राकृत तो हर जैनी पढ़ता है। णमोकार मंत्र, भक्तामर स्तोत्र इसका प्रमाण हैं। उन्होंने मांग की कि हर विश्वविद्यालय में प्राकृत भाषा का कोर्स शुरू होना चाहिए।

ध्वज स्थापना में इनकी रही सहभागिता 

इस दौरान सर्वप्रथम ध्वज स्थापना पूर्व डीजीपी शांतकुमार, सरकार्यवाह राकेश गोयल, भोपाल विपिन सिंघई कीर्ति जैन महेंद्र भइया, एसके जैन गुना सहित अन्य प्रमुख जनांे ने किया। वहीं दीप प्रज्वलन महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री विजय धुर्रा, सांसद प्रतिनिधि संजीव भारल्लिय, जिला कोषाध्यक्ष मनोज रन्नौद, संजय के अलावा मुंगावली, भोपाल, ग्वालियर, सागर, ललितपुर के प्रतिनिधियों ने सहभागिता दी।

कार्यकर्ता सम्मेलन पहुंच उपस्थिति दर्ज कर रहे 

यह सम्मेलन अशोकनगर और शिवपुरी जिले के संगठन को मजबूती देने के लिए विशेष रूप से किया गया था। समाज के महामंत्री राकेश अमरोद, सुनील अखाई, विपिन सिंघई, शैलेन्द्र दद्दा, संजीव भारल्लिय, मनोज रन्नौद, हेमंत टडैया, अशीष बजरंगी, मनीष सिघई के अलावा मुंगावली, ईसागढ़, चंदेरी, शाढ़ौरा आदि स्थानों से समाजजन आ रहे हैं। इस दौरान प्रमुख कार्य वाहक राकेश गोहिल भोपाल ने कहा कि हम छोटी-छोटी इकाइयों से इस संगठन को मजबूती दे रहे हैं। संगठन की शक्ति से हम समाज को आगे बढ़ाएं, ये सम्मलेन अशोक नगर, शिवपुरी, गुना के संगठन विस्तार के लिए किया गया। इस अवसर सोमवार को ललितपुर-ग्वालियर संभाग, सागर, भोपाल संभाग की विशेष उपस्थिति हो रही है।

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