भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
विदिशा। भाव विशुद्धि युक्त अनुराग ही भक्ति है। इसमें व्यक्ति सबकुछ भूलकर गुरु का हो जाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में शीतलधाम व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गुरु सान्निध्य के बाद भी जिनके अंदर भक्ति भाव नहीं उभर पाता। उनका कभी उद्धार नहीं हो सकता। हमने न केवल गुरु को पाया अपितु गुरु ने हमारे ऊपर कृपा बरसा कर हमें अपना प्रतिनिधि बनाया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ का यह अल्पप्रवास है उनको राहतगढ़ में 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के लिये जाना है। अतः यह बीच का समय विदिशा नगर को मिल गया। मुनि श्री ने कहा कि आप लोगों पर 1992 से जो गुरु कृपा बरसी वह फिर लगातार बरसती रही और इस शहर को जैन धर्म के दशवंे तीर्थंकर भगवान शीतलनाथ के नाम से पहचान दी।
भगवान शीतलनाथ की जन्म भूमि को लेकर तीन क्षेत्र विकसित हो गए
जब मैं वर्ष 1992 में विदिशा आया था तब मैंने अनेक ग्रंथों को पढ़ा और शोध किया था तब यह बात प्रमाणिक हो गयी थी कि वर्तमान का विदिशा शहर ही अतीत का भद्दिलपुर है। यहां पर तीन शिलालेख साक्ष्य प्राप्त हुए थे। जिसमें सबसे पहला श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में श्री पारसनाथ भगवान के पादमूल में 500 साल पुराना शिलालेख है। दूसरा विदिशा के एक प्राचीन कुएं में भद्दिलपुर लिखा मिला जो लगभग 800 साल पुराना है तथा तीसरा राजस्थान के चांदखेड़ी के एक शिलालेख में विदिशा का नाम भद्दिलपुर अंकित है। उसी समय पर एक किताब भी छपी थी। ‘पावन कल्याणक भूमि भद्दिलपुर पर एक अध्ययन’। मुनि श्री ने कहा कि भगवान शीतलनाथ की जन्म भूमि को लेकर तीन क्षेत्र विकसित हो गए। ,क्षेत्र का विकसित होंना बुरा नहीं है पर जन्मभूमि तो एक ही है और यह तुम्हारा भद्दिलपुर है।
एकजुटता के साथ इस कार्य को पूर्ण करे
जहां गुरुदेव की कृपा बरसी और यह उतुंग समवशरण तुम लोगों के बीच में है। काम अपनी गति से चल रहा है और आप लोगों ने इसमें बहूत कुछ लगाया भी है लेकिन, अब जबकि कार्य पूर्णतः की ओर है। उसमें पूरी तरह लगे रहने की जरूरत भी है। जितना उत्कृष्ट कार्य आप कर सकते हैं। उतना उत्कृष्ट कार्य आप लोग कीजिए। उन्होंने कहा कि प्रण कर लो और पूरी समाज मिलजुलकर एकजुटता के साथ इस कार्य को पूर्ण करे। मुनि श्री ने कहा कि इतना उतंग समवशरण पूरे भारत में कहीं नहीं बना। आप सभी लोग कमर कसके तैयार हो जाइये। उन्होंने कहा कि मुनिश्री संभवसागरजी महाराज जी यहां पर हैं ही उनके मार्गदर्शन में वह जैसा कहें इस काम को आगे बढ़ाओ। सभी लोग सकारात्मक एवं सहयोगात्मक दृष्टि रखकर बाकी बातें गौण करें।
ागवान शीतलनाथ स्वामी का यह समवशरण पूर्णतः की ओर है
इस अवसर पर श्री संभवसागर महाराज ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धर्म के मामले में जो सूखा क्षेत्र था आचार्य गुरुदेव की ऐेसी कृपा हुई कि सूखा क्षेत्र हरियाली में परिवर्तित हो गया। उन्होंने कहा कि यह जो विशाल समवशरण देख रहे हैं। यह विदिशा वालों की गुरु भक्ति का प्रदर्शन ही है। भगवान शीतलनाथ स्वामी का यह समवशरण पूर्णतः की ओर है। यह मध्यप्रदेश का ऐसा पहला क्षेत्र है जहां पर भगवान के चार कल्याणक हुए हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकृपा का आशीर्वाद है, जो हम सभी पर बरसा एवं 25 वर्ष तक लगातार संयोग मिला। उन्होंने कहा कि भले ही आज गुरुदेव नहीं है लेकिन, हम सभी के बीच में आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के रूप में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि बड़े भाई प्रमाणसागर महाराज आए हैं। हम सभी को बहूत अच्छा लगा और हम सभी उनको ही सुनने के लिये आतुर है।
आहार चर्या का सौभाग्य अर्जित किया
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिसंघ ने दोपहर में समवशरण मंदिर का अवलोकन किया। भविष्य में विदिशा को एक नई पहचान देगा। यह कला एवं स्थापत्य का अदभुत उदाहरण है। मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज को निरंतराय आहार कराने का सौभाग्य बसंत जैन, सचिन जैन परिवार को मिला। वहीं मुनि श्री संभवसागरजी महाराज के आहार का सौभाग्य शीतल महिला मंडल को मिला।
मंगलवार को यह होंगे कार्यक्रम
द्वय मुनि संघ के मंगल सानिध्य में मंगलवार को चतुर्दशी पर प्रातः7.30 से 1008 भगवान आदिनाथ बर्राे बाले बाबा का महा मस्तकाभिषेक होगा तथा मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा होगी। 8.30 बजे से मुनिसंघ के प्रवचन होंगे। 10 बजे आहार चर्या शीतलधाम से संपन्न होगी। शीतलविहार न्यास एवं श्री सकल दिगंबर जैन समाज सभी धर्मश्रदालुओं से निवेदन करता है कि समय पर पधारें और धर्मलाभ लें।













Add Comment