कथावाचक अनिरुद्धाचार्य श्री ने सभी जैन संत समाज से अपने व्यक्तित्व की क्षमा याचना की और कहा कि क्षमा वीरस्य भूषणम यह जैनों का इतिहास रहा है। क्षमा करने में सिर्फ जैन समाज का ही एक ऐसा त्यौहार आता है जिसमें सब से क्षमा याचना की जाती है। पढ़िए राजेश जैन द्ददू की रिपोर्ट…
इंदौर। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य श्री ने सभी जैन संत समाज से अपने व्यक्तित्व की क्षमा याचना की और कहा कि क्षमा वीरस्य भूषणम यह जैनों का इतिहास रहा है। क्षमा करने में सिर्फ जैन समाज का ही एक ऐसा त्यौहार आता है जिसमें सब से क्षमा याचना की जाती है।
अनिरुद्धाचार्य ने अपने प्रवचन के दौरान कुछ ऐसे शब्द का प्रयोग किया था जिससे जैन समाज में असंतोष व्याप्त हो गया था। आज उसके लिए आज संत समाज से क्षमा प्रदान करने की प्रार्थना की नमोस्तु शासन जयवंत हो। यह सब जैन समाज की एकता की आवाज से ही सम्भव हो पाया है।













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