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सिद्धम भैया से मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज तक का सफर: नांद्रे में विराजित मुनिश्री का चल रहा वर्षायोग 


मध्यप्रदेश में चंबल संभाग के डाकू ग्रस्त भिंड जिले के अंतर्गत प्रसिद्ध रूर नगर की पावन धरा पर श्रेष्ठीवर्य कपूरचंद की धर्मपत्नी उषा जैन जी की कुक्षी से 7 सितंबर 2002 में जन्म लेकर ‘सिद्धम’ नाम प्राप्त किया। रूर कि भूमि सदैव वंदनीय रही है क्योंकि, जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ। उसी घर में मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ है। नांद्रे से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


नांद्रे। मध्यप्रदेश में चंबल संभाग के डाकू ग्रस्त भिंड जिले के अंतर्गत प्रसिद्ध रूर नगर की पावन धरा पर श्रेष्ठीवर्य कपूरचंद की धर्मपत्नी उषा जैन जी की कुक्षी से 7 सितंबर 2002 में जन्म लेकर ‘सिद्धम’ नाम प्राप्त किया। रूर कि भूमि सदैव वंदनीय रही है क्योंकि, जिस परिवार में आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ। उसी घर में मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज का जन्म हुआ है। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के पूर्वाश्रम के भतीजे हैं मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज। सिद्धम भैया जी की लौकिक शिक्षा एचएससी तक हुई। देवपूजा, शास्त्र स्वाध्याय और तीर्थ यात्रा करना आपका मुख्य कर्तव्य था। मुनिराजों का विहार कराना, चातुर्मास कराना, वैयावृत्ती करना, आहार दान देना आदि में आप सदैव अग्रणी रहे। सिद्धम भैया ने धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज से भिंड में 15 अगस्त 2019 को मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर संघ में प्रवेश किया। इसके पश्चात बाल ब्रह्मचारी सिद्धम भैया ने सन 2020 में पटना (बिहार) के चंडी गांव में द्वितीय प्रतिमा व्रत लिया। ओजस्वी वक्ता, सरल व्यक्तित्व, गुरु भक्ति में निपुण सिद्धम भैया ने लगातार चार वर्ष तक संघस्थ ब्रह्मचारी रहकर गुरु मुख से शास्त्रों का अध्ययन किया।

मुनि श्री सिद्ध सागर जी का जीवन एक महान आदर्श

25 अक्टूबर 2023 का वह शुभ दिन आया, जब आचार्य श्री विशुद्धसागर जी ने आपकी योग्यता परखकर आपकी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढाते हुए बड़ौत में अपार जनसमूह के समक्ष मुनि दीक्षा प्रदान कर आपको मुनि श्री सिद्धसागर जी कहकर पुकारा। मुनिश्री सिद्ध सागर जी का मंगल वर्षायोग (चातुर्मास )वर्ष 2024 में नांदणी (महाराष्ट्र) हुआ और वर्ष 2025 का चातुर्मास नांद्रे (महाराष्ट्र) में चल रहा है। मुनि श्री सिद्धसागर जी महाराज गुरु चरणों में रहकर निरंतर शास्त्रों का स्वाध्याय, ध्यान, उपवास में अपने समय का सदुपयोग करते रहते हैं। मुनि श्री सिद्ध सागर जी का जीवन एक महान आदर्श है।

गांव-गांव भ्रमण करते हुए जिन धर्म की सतत धर्म प्रभावना कर रहे हैं

आपके गृहस्थावस्था के भाई-बहन विकास जैन, पंकज जैन, सपना जैन और प्रीति जैन भी निरंतर धर्म साधना करते हुए शास्त्र-स्वाध्याय में मग्न रहते हैं। समाज को आप जैसे मुनिराज पर गर्व है। आप गांव-गांव भ्रमण करते हुए जिन धर्म की सतत धर्म प्रभावना कर रहे हैं। धन्य हैं आपका त्याग और तपस्या। आप स्वभाव से विनम्र एवं मितभाषी हैं। आपके प्रवचन प्रभावशाली होते हैं। मैं अपने आपको भाग्यशाली समझता हूं कि मुझे मुनि श्री सिद्ध सागर जी के रुप में मुझे सच्चे गुरु एवं सच्चे मित्र मिले हैं। मेरी यही भावना है कि जीवन के अंतिम सांस तक गुरु-शिष्य का यह नाता बना रहे।

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