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धर्मसभा में दिए प्रवचन : गुरु चलता फिरता तीर्थ है- मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज


छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि गुरुओं की मुक्ति का रास्ता अलग है और श्रावक की मुक्ति का रास्ता अलग है। जब श्रावक सुख का मार्ग पूछे तो मुझे अपने विचारों से श्रावक बनना पड़ेगा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। छत्रपति नगर के दलाल बाग में मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संसार में कोई भी वस्तु ऐसी नहीं है जिसका कोई उपयोग नहीं हो। सांप के मुख में जो विष रहता है उसका भी उपयोग होता है। हमें कचरे का उपयोग मालूम न होने के कारण हम उसको फेंक देते हैं। किसने सोचा था कि कभी कचरे को सूखा – गीला अलग करके उसकी भी एक इंडस्ट्री हो सकती है, जो चारकोल बनाने के काम आती है।

उन्होंने कहा कि हमने बड़ी-बड़ी गलतियां की हैं। सृष्टि पर पूरी की पूरी पर्याय निकल गई हमें उसके विषय में पता ही नहीं कि हम यहां क्यों आए थे? गुरुदेव ने जब उपसंघ बनाकर हमें अलग किया था, तो कहा था अभी तक तुम साधु बनकर रहते थे अब तुम्हें गुरु बनकर रहना है। गुरुओं की मुक्ति का रास्ता अलग है और श्रावक की मुक्ति का रास्ता अलग है। जब श्रावक सुख का मार्ग पूछे तो मुझे अपने विचारों से श्रावक बनना पड़ेगा। उद्बोधन दार्शनिक होता है। इंदौर शहर में साधु कम गुरु ज्यादा है। श्रावक के बिना धर्म नहीं है।

   एक साधु के जीवन के 3 करिश्मे हैं… 

1- साधु अनछने पानी का उपयोग नहीं करता।

2- साधु 1 लीटर पानी में पूरा दिन निकाल लेता है .

3- साधु बनने के बाद कभी किसी महिला को नहीं छूता। वो सभी महिलाओं को मां बहन का ही उच्चारण करता है।

साधु को अपनी भाषा मन परिष्कृत करना पड़ता है।

गुरु चलता फिरता तीर्थ है । साध्य के प्रति जितना आकर्षण है , उतना साधना के प्रति बनाओ। आपने कहा कि तुमने क्या किया अपने धर्म के लिए ? तुम्हारे गुरु के पुरुषार्थ / साधना से तुम्हारी पहचान हुई।तुम्हें भक्तों की श्रेणी में डालने वाले गुरुदेव ही हैं। मैं चाहता हूं आप सभी का जीवन सफल हो। दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के प्रचार प्रमुख सतीश जैन ने बताया कि आज प्रातः गुरुदेव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन के बाद गुरुदेव की आठ द्रव्यों से सभी श्रावक- श्राविकाओं ने पूजन की। इस अवसर पर सतीश डबडेरा, सतीश जैन, शिरीष अजमेरा,अखिलेश- अरविंद सोंधिया, पवन जैन भूपेंद्र जैन,, आनंद जैन, आलोक बंडा, आदि विशेष रूप से मौजूद थे। पूज्य मुनि श्री निस्वार्थ सागर जी एवं क्षुल्लक श्री हीरक सागर जी महाराज भी मंच पर विराजित थे। मंदिर की में प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे आचार्य भक्ति 7:00 बजे शांति धारा होती है । 10:00 आहार चर्या होती है। रविवार, 4 अगस्त को दोपहर 2:00 बजे से प्रवचन, दलाल बाग मे होंगे। इसके साथ ही दानदाताओं को प्रशस्ति पत्र भी दिए जाएंगे।

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