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दिगंबर जैन समाज का विराट व्यक्तित्व ; पंडित जयसेन जैन बाबू जी को विनम्र श्रद्धांजलि


बाबूजी जयसेन जैन के कार्यों का गुणगान करना मेरे लिए छोटा मुंह बड़ी बात होगी, लेकिन मैंने उनके विराट व्यक्तित्व को जितना देखा उसे ही बता रहा हूं। यहां आलेख संपादकीय युगों-युगों तक हमारे तीर्थंकरों भगवान आदिनाथ से महावीर तक की बातों को युवा पीढ़ी तक पहुंचती रहेगी। इंदौर से पढ़िए हरिहर सिंह चौहान की यह प्रस्तुति…


इंदौर। धर्म और समाज में जब समन्वय एकजुटता के साथ विद्वान ज्ञानी और राष्ट्र भक्त व्यक्ति मिलता है तो उस समाज के लिए गर्व की बात होती है। इंदौर में दिगंबर जैन समाज में एक समय था जब न्याय सूरी पंडित नाथूलाल शास्त्री जैसे और वरिष्ठ विद्यावान गुनी व्यक्ति थे। जिनसे पूरे भारत में इंदौर का समाज उनके नाम से जाना जाता था। उन्हीं पंडित जी के आशीर्वाद और शिक्षा से उसी विरासत संभालने के लिए महावीर ट्रस्ट और देवकुमार सिंह कासलीवाल जैसे समाज रत्न के साथ मिलकर पूरे भारत में दिगंबर जैन समाज के दिव्य और आलोकित रोशनी से दिगंबर जैन समाज का नाम रोशन करने वाले वरिष्ठ कलमकार लेखक विचारक चिंतक वरिष्ठ जैन पत्रकार, वरिष्ठ शिक्षक और दिगंबर जैन समाज के विद्यावान पंडित जयसेन जैन का विराट व्यक्तित्व का चला जाना बहुत दुःखद है। ऐसे तो बाबूजी जयसेन जैन के कार्यों का गुणगान करना मेरे लिए छोटा मुंह बड़ी बात होगी, लेकिन मैंने उनके विराट व्यक्तित्व को जितना देखा उसे ही बता रहा हूं। जब महावीर ट्रस्ट हो या कुंदकुंद ज्ञानपीठ का आफिस जहां देवकुमार सिंह कासलीवाल, अनुपम जैन, प्रदीप कासलीवाल और वीर निंकलक के संपादक रमेश कासलीवाल के साथ पंडित जयसेन बाबूजी का वह सौम्य व्यवहार मैंने देखा है और जब भी वह श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जबरी बाग़ नसिया जी में आते थे तो पारस प्रभु के अतिशय से रह नहीं पाते थे।

वर्तमान पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व से सीख लेनी चाहिए

सभी से बात करना पुराने दिनों के बारे में अपने छोटों को बताना जब सेठ हुकुमचंद के बारे में और पंडित नाथूलाल शास्त्री, धर्मचंद जैन, ताराचंद जैन छात्रावास में संस्कृत महाविद्यालय नसिया में पढ़ते थे। उन दिनों की बात किया करते थे। ऐसे तो छावनी दिगंबर जैन समाज और अनंतनाथ जिनालय को जो ऊंचाईयां बाबूजी ने दी उसे भूला देना संभव नहीं है। बढ़ती उम्र के बाद भी वह भजन आरती व भक्तमार पाठ शांतिधारा में शामिल होते थे। समाज सेवा में आप हमेशा लगे रहे। वर्तमान पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व से सीख लेनी चाहिए।

शीतल जल सेवा करते थे

बुजुर्गो को लेकर एक ओल्ड सोशल ग्रुप में पंडित जयसेन जैन बाबू जी भी जुड़े रहे। जब इंदौर रेलवे स्टेशन पर हर साल दिगंबर जैन समाज ओल्ड सोशल ग्रुप के दादा-दादी, नाना-नानी अम्मा यात्रीगण को शीतल जल सेवा करते थे और यह सभी सदस्य तीर्थ यात्रा, प्रभातफेरी, भक्तमार पाठ आदि कार्यक्रम करते रहते थे। पूरे भारत के दिगंबर जैन समाज में पंडित जयसेन जैन की अपनी अलग पहचान थी।

संपादकीय समाज जागरण की मुख्य धरोहर है

संत, आचार्य, मुनि, महाराज, आर्यिका माता जी, दीदी भैय्या जी सभी उनके प्रति विनम्र और उदारता के भाव रखते थे। पंडित जी उनके ज्ञान व धर्म संबंधी गुणों के ज्ञान के वैचारिक मंथन करते रहते थे। यह उनके संपादकीय लेखों में दिखता था। महावीर ट्रस्ट से निकलने वाली मासिक पत्रिका सन्मति वाणी में पंडित जयसेन जैन के संपादकीय समाज जागरण की मुख्य धरोहर है। उनकी क़लम हमेशा सच्चाई का साथ देती थी। उनके काटक्ष समाजिक जिम्मेदारी व धर्म संबंधी लेखों में नए संकल्पों को साकार करती रही। आज बाबूजी जयसेन जैन जी हमारे बीच नहीं है पर उनके यहां आलेख संपादकीय युगों-युगों तक हमारे तीर्थंकरों भगवान आदिनाथ से महावीर तक की बातों को युवा पीढ़ी तक पहुंचती रहेगी। अनेक संतों आचार्य का आशीष उन्हें हमेशा मिलता रहा। वरिष्ठ वयोवृद्ध जैन पत्रकार पंडित जयसेन जैन को नसिया जी दिगंबर जैन समाज इंदौर की और से भावभीनी श्रद्धांजलि व शत शत नमन।

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