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उपाध्याय श्री विहसन्त सागरजी ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश: जैन समाज के साथ विधायक ने भी की अगवानी


उपाध्याय विहसन्त सागरजी गुरु आज्ञा और सकल जैन समाज के निवेदन से नगर में चातुर्मास करने पधारे तो विधायक नरेंद्रसिंह कुशवाह सुबह 6 बजे सकल जैन समाज के साथ मुनिराज की अगवानी करने अटेर रोड पहुंचे। वहां पर विधायक ने भक्तों के साथ मुनिराज का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर…


भिंड। गणाचार्य विराग सागर महाराज के पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी के शिष्य उपाध्याय विहसन्त सागरजी गुरु आज्ञा और सकल जैन समाज के निवेदन से नगर में चातुर्मास करने पधारे तो विधायक नरेंद्रसिंह कुशवाह सुबह 6 बजे सकल जैन समाज के साथ मुनिराज की अगवानी करने अटेर रोड पहुंचे। वहां पर विधायक ने भक्तों के साथ मुनिराज का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह स्वागत द्वार भक्ति डांडिया आरती बैंडबाजों की मधुर ध्वनि के साथ नृत्य करते हुए चल रहे थे। मुनिराज का भव्य मंगल प्रवेश अटेर रोड, पुस्तक बाजार, बताशा बाजार, गोल मार्केट, सदर बाजार होते हुए बद्री प्रसाद की बगिया पहुंचे। पंडाल का उद्घाटन सरिता टीपू जैन विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह आदि ने किया। इस अवसर पर उपाध्याय विहसन्त सागरजी ने प्रवचनों में कहा कि क्षुल्लक अवस्था सन 2019 चैत्यालय जैन मंदिर बताशा बाजार में चातुर्मास किया और बीच में कई बार वेदी प्रतिष्ठा शिखर कलश स्थापना एवं पंचकल्याणक आदि कार्यक्रम के लिए आता रहा। यहां के भक्तों की भक्ति और गुरु के अधूरे कार्य पूर्ण करने गुरु आज्ञा लेकर चातुर्मास करने आया हूं। हम सभी लोग परम आराध्य भगवान महावीर स्वामी के समवशरण स्थल पर बैठे हैं, जो 2500 वर्ष पूर्व संदेश देकर गए थे। उनकी गाथाएं सुनाने आया हूं।

मुनिराज ने कहा कि जो श्रावक दिगंबर साधु को विहार करा लेता है। उसे सम्मेद शिखर की वंदना के बराबर फल मिलता है क्योंकि, वहां से अनंता अनंत साधु मोक्ष को गए थे। भिंड एक ऐसी जगह है। जहां से लगभग 90 भक्तों ने दीक्षा लेकर मोक्ष मार्ग को चुना। हमारे गुरु समाधि सम्राट गणाचार्य विराग सागरजी ने 7 चातुर्मास कर 90 साधुओं को मोक्ष मार्ग का रास्ता दिखाया। जो आज हिंदुस्तान के अनेकों प्रांतों में धर्म की ध्वजा लहरा रहे हैं। इस नगरी का यह अनोखा चातुर्मास होगा जिसमें बिना बोली के पहले ही कलशों को बुक करा दिया। इसीलिए इसका नाम आकर्षणमय वर्षा योग रखा गया है।

साधु के आने से मंगल ही मंगल 

मुनिराज ने कहा कि साधु का आना मंगल, जाना मंगल, जहां बैठेंगे वहां भी करेंगे मंगल। तभी तो साधु के जाते समय भी मंगल विहार लिखा जाता है और जब आते हैं तो मंगल प्रवेश लिखा जाता है। आप सभी का बहुत बड़ा सौभाग्य है कि नगर में साधु चातुर्मास कर रहे हैं क्योंकि, महावृती जब वचन देता है तो प्राण भी चले जाएं तो वचन को निभाते हैं। गुरु आज्ञा से दिन समय निश्चित करता हूं। उनकी आज्ञा का पालन करते हुए आज आपकी नगरी में कुछ लेकर आया हूं। यहां भक्तों को जिनवाणी की दो बूंद कान में डालने आया हूं। 20 वर्ष पूर्व यहां चातुर्मास किया। वह बीज आज फसले बनी हैं। उन फसलों की नस्लों को सुधारने आया हूं। जिसमें स्वाध्याय बच्चों की क्लास आदि समय-समय पर लगाकर बच्चों को पढ़ाने आया हूं।

मुनिराज ने उसे महातीर्थ बना दिया

विधायक नरेंद्रसिंह कुशवाह ने कहा कि आज बहुत खुशी का दिन है। जिन्होंने धर्म का जागरण पूरे भारतवर्ष के साथ बरासों को स्वर्ग बना दिया। आपने कभी कल्पना नहीं की थी, पहले कैसा था और अब कैसा है। मुनिराज ने उसे महातीर्थ बना दिया। ऐतिहासिक पंचकल्याणक और गजरथ महोत्सव हुआ। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर भी आए और सभी का सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि जिस शहर में साधु संत वर्षा योग चातुर्मास करते हैं वह शहर धर्ममय हो जाता है।

कार्यक्रम में यह समाजजन उपस्थित रहे       

कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों द्वारा भक्तिमय मंगलाचरण प्रस्तुत किया। पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट नरेश जैन मुंबई परिवार द्वारा किया गया। वहां पर जगदीश जैन दद्दा रतनलाल जैन, राजीव जैन, अशोक जैन कक्का, महेश पहाड़िया, रमेश जैन बिरगमा, संजीव जैन बल्लू, राजेंद्र जैन, प्रभास जैन, पार्षद मनोज जैन, यश जैन, बिट्टू जैन, अनिल जैन, विनोद जैन, विमल जैन, इंजीनियर राकेश जैन, पवैया, चक्रेश जैन, नरेश जैन, भाजपा नेता रामावतार शिवहरे, सामाजिक संगठन की महिला मंडल महिला पुरुष बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

कलश स्थापना रविवार को

उपाध्याय विहसन्त सागर महाराज के चातुर्मास के कलश की स्थापना रविवार को बद्री प्रसाद की बगिया में किया जाएगा। पार्षद मनोज जैन ने बताया कि उपाध्याय विहसन्त सागरजी, मुनि विश्वसाम्य सागरजी के चातुर्मास के लिए मंगल कलश स्थापना बद्री प्रसाद की बगिया में रविवार को 11 बजे होगी एवं कलश की स्थापना पवैया जैन मंदिर नंबर एक स्कूल के सामने होगी। जिसमें सभी भक्तों को पीली सरसों लाने के लिए मुनिराज ने कहा है।

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