नगर गुरुवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला दिगंबर जैन समाज का वार्षिक रथयात्रा महोत्सव इस बार और भी अधिक भव्यता, अनुशासन और दिव्यता के साथ हुआ। अंबाह से पढ़िए, अजय जैन की खबर…
अंबाह। नगर गुरुवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला दिगंबर जैन समाज का वार्षिक रथयात्रा महोत्सव इस बार और भी अधिक भव्यता, अनुशासन और दिव्यता के साथ हुआ। शहर के इतिहास में यह आयोजन हमेशा विशेष स्थान रखता है, किंतु इस वर्ष का आयोजन अपने आध्यात्मिक वैभव, सजावट, श्रद्धालुओं की व्यापक सहभागिता और दिव्य वातावरण के कारण यादगार बन गया। श्री आदिनाथ दिगंबर जैन छोटे मंदिर परिसर में दोपहर 2 बजे शंख‑नाद, नगाड़ों की गूँज और “ॐ ह्रीं नम: सिद्धेभ्य:” जैसे मंत्रों के साथ रथयात्रा का शुभारंभ हुआ। प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की मनोहारी प्रतिमा को भव्य रथ पर विराजमान किया गया। रथ की सजावट में पीला, केसरिया और लाल रंग की आकर्षक थीम ने पूरे वातावरण को दैवीय अनुभूति प्रदान की।
महिलाओं ने गाए मंगल गान
जैसे ही रथ प्रारंभ हुआ तो बैंडबाजों की धुन पर भक्ति के स्वर गूंजने लगे। प्रभु रथ पर हुए सवार, नगाड़ा बज उठा…’मेरे महावीर झूले पलना…’जैसे भजन वातावरण को धर्ममय बनाने लगे। युवा सफेद वस्त्र पहनकर अनुशासित ढंग से रथ के आगे‑पीछे चल रहे थे। महिलाएं मंगलगान गाती हुई रथयात्रा की गरिमा को कई गुना बढ़ा रही थीं। नन्हे‑मुन्ने बालक‑बालिकाएं, ध्वजा और धार्मिक पट्टिकाएं लिए हुए चल रहे थे। जिससे पूरा नगर भक्ति‑रस से भरा दिख रहा था।
मुख्य मार्गों पर पुष्पवर्षा और स्वागत आरती
रथयात्रा जयश्वर रोड, सदर बाजार, परेड रोड, नपा चौराहा और गंज बाजार सहित नगर के प्रमुख मार्गों से निकली। जगह‑जगह समाजजनों, व्यापारियों और श्रद्धालुओं ने प्रभु के रथ की आरती उतारी और पुष्पवर्षा से स्वागत किया। कई स्थानों पर भक्ति गीतों और शांति मंत्रों की धुन पर आध्यात्मिक वातावरण और भी अलौकिक हो उठा। बाजारों में दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों ने जल‑सेवा, फल‑प्रसाद की व्यवस्था कर श्रद्धालुओं की सेवा का सौभाग्य प्राप्त किया।
शाम 4 बजे संत वाटिका में दिव्य अभिषेक
रथयात्रा के संत वाटिका जैन बगीची में पहुँचने के बाद भगवान आदिनाथ का शास्त्रोक्त विधि से अभिषेक हुआ। जैसे ही शांत वातावरण में मंत्रोच्चार आरंभ हुआ तो चारों तरफ ‘रिद्धि‑सिद्धि दाता भगवान आदिनाथ की जय’
के जयघोष से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। शुद्ध जल से प्रभु का अभिषेक किया गया। महिलाएँ पारंपरिक परिधान में मंगलगीत गाती हुईं भगवान की आराधना में लीन थीं, जिससे वातावरण और भी दिव्य बन गया। आयोजन के दौरान कलश‑अभिषेक का दृश्य देखते ही बनता था। इस दौरान मानो पूरा परिसर धर्म‑रस में डूब गया हो। अभिषेक के बाद शांतिधारा और सामूहिक आरती सम्पन्न हुई। भक्तों ने प्रभु से नगर की सुख‑समृद्धि, समाज के कल्याण और वैश्विक शांति की कामना की।
समाज के पदाधिकारियों ने की भागीदारी
महोत्सव में जैन समाज अंबाह के अध्यक्ष जिनेश जैन, महामंत्री सुरेश जैन नागर सहित संपूर्ण सकल दिगंबर जैन समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समाज के वरिष्ठजनों ने बताया कि इस रथयात्रा का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का संरक्षण, युवाओं में आध्यात्मिकता का प्रसार और समाज में एकता का भाव बढ़ाना है। आयोजन में पूरी तरह अनुशासन, सौहार्द और सहयोग देखने को मिला। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इसे अत्यंत सफल और अविस्मरणीय बना दिया।













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