समाचार

9वें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत जी का गर्भकल्याणक 10 फरवरी: तिथि के अनुसार फाल्गुन कृष्ण नवमी को मनाया जाएगा 


जैन धर्म के तीर्थंकरों के कल्याणकों को लेकर दिगंबर जैन मंदिरों में खासतौर पर विशेष आराधना, भक्ति और पूजन, विधान सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं होती हैं। कल्याणकों को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह और अपार उल्लास रहता है। अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण, देव-शास्त्र-गुरु के पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया जाता है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष शृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति…


इंदौर। जैन धर्म के तीर्थंकरों के कल्याणकों को लेकर दिगंबर जैन मंदिरों में खासतौर पर विशेष आराधना, भक्ति और पूजन, विधान सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं होती हैं। कल्याणकों को लेकर समाजजनों में विशेष उत्साह और अपार उल्लास रहता है। अभिषेक, शांतिधारा, अर्घ्य समर्पण, देव-शास्त्र-गुरु के पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया जाता है। भगवान के गर्भ कल्याणक से लेकर मोक्ष कल्याणक का जैन समाज में बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। आराधना के लिए भगवान के कल्याणकों का कोई भी अवसर मंदिरों में छोड़ा नहीं जाता। 10 फरवरी को भगवान पुष्पदंत जी का गर्भ कल्याणक मनाया जाएगा। तिथि के अनुसार गर्भकल्याणक फाल्गुन कृष्ण नवमी को मनाया जाता है। इस बार भी भगवान पुष्पदंत जी का गर्भ कल्याणक शहर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिरों में मनाया जाएगा और विशेष आराधनाएं होंगी। भगवान पुष्पदंत जी (सुविधिनाथ) जैन धर्म के 9वें तीर्थंकर हैं। जिनका गर्भ कल्याणक फाल्गुन कृष्णा नवमी को हुआ था। माता जयरामा (रानी राम) ने गर्भ में आने के समय स्वप्न में ‘पुष्प’ (फूल) देखे थे। इसलिए नाम पुष्पदंत पड़ा। पिता का नाम राजा सुग्रीव और जन्म स्थान काकंदी (उत्तर प्रदेश) था। भगवान पुष्पदंत जी का जन्म कल्याणक मार्गशीर्ष शुक्ल प्रतिपदा (एकम) को मनाया जाता है। भगवान का चिन्ह मगरमच्छ (मकर) है। उनका वर्ण श्वेत (गोरा) है। भगवान पुष्पदंत जी की जन्म नगरी काकंदी (आधुनिक खुखुंदू, देवरिया, उत्तर प्रदेश) है। भगवान पुष्पदंत जी के माता जयरामा ने गर्भ धारण के समय कई दिव्य स्वप्न देखे थे, जिसमें मुख्य रूप से ‘पुष्प’ की अधिकता थी। इस कारण उनका नाम पुष्पदंत रखा गया। चूँकि उनके गर्भ में आने के बाद से ही राज्य में सभी कार्य सुव्यवस्थित (सुविधि) हो गए थे। इसलिए उन्हें ‘सुविधिनाथ’ के नाम से भी जाना जाता है और पूजा जाता है।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

About the author

Shree Phal News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page