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श्री कल्पद्रुम महामंडल विधान में हो रही है आठ भूमि की पूजा : हमारे जीवन के प्रथम गुरु हमारे माता-पिता ही हैं – मुनिश्री पूज्य सागरजी


अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्य सागरजी महाराज ने मां अहिल्या की नगरी के पश्चिम क्षेत्र स्थित अतिशयकारी नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा में चल रहे श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के पांचवे दिन प्रवचन के दौरान कहा कि आचार्य भगवंत कहते हैं कि प्रभु के दर्शन करो या न करो लेकिन माता-पिता का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए। कल्पद्रुम महामंडल विधान के तहत प्रातःकाल मंगलाष्टक के बाद विधान मंडप में विराजित समस्त जिन प्रतिमाओं के अभिषेक एवं शांतिधारा चक्रवर्ती समूह द्वारा किए गए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


इंदौर। मां की महिमा ही ऐसी होती है कि मां अपने बच्चे को सूखे में सुलाती है और स्वयं बच्चे के कारण गीले में भी सो जाती है।

हमारे तीर्थंकरों को भी मां ने ही जन्म दिया है।

जब एक महिला मां बन जाती है, तब वह सब कुछ भूल कर अपने बच्चे का ही ध्यान रखती है।

जिस प्रकार गाय अपने बच्चे के लिए कई प्रकार की वेदना सहकर भी दूध रखती है, उसी प्रकार वात्सल्य ही प्रेम का प्रतीक है।

यह बात अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्य सागरजी महाराज ने मां अहिल्या की नगरी के पश्चिम क्षेत्र स्थित अतिशयकारी नवग्रह जिनालय ग्रेटर बाबा में चल रहे श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान के पांचवे दिन प्रवचन के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि आचार्य भगवंत कहते हैं कि प्रभु के दर्शन करो या न करो लेकिन माता-पिता का आशीर्वाद अवश्य लेना चाहिए।

हिन्दू धर्म में भी गणेश जी का वर्णन अवश्य आता है कि कैसे उन्होंने भी अपने माता-पिता की परिक्रमा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था, जिसके कारण आज वह प्रथम पूजनीय हैं।

जिस दिन आपको माता-पिता बोझ लगने लगें, उस दिन से संसार में आपका सबसे बड़े दुखी दिन प्रारंभ होने लगते हैं।

हमारे आचार्य भगवंत कहते हैं कि करोड़ों का दान भी दे दो तो क्या, मां के प्रति प्रेम भाव नहीं रखा तो उसी दिन से आपका विनाश या पतन की ओर अग्रसर होना शुरू हो जाता है।

शांतिधारा से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान में आठ भूमि – चैत्य प्रसाद भूमि, खातिका भूमि, लता भूमि, उपवन भूमि, ध्वजा भूमि, कल्पवृक्ष भूमि, भवन भूमि, श्रीमंडप भूमि की हम पूजा करते हैं।

विधान में अनेकों राज्यों से आए धर्मवलंबी श्रावकगण सहभागिता कर धर्म लाभ ले रहे हैं।

 

विधान के पांचवे दिन प्रातः काल में सूर्य की प्रथम किरण के साथ पंडित विनोद पगारिया, पंडित किर्तेश जैन के सानिध्य में डॉ. नाभिनन्द, प्रदीप कुमार विद्या पैलेस, इंदौर ने मुनिश्री के मुखारविन्द बीजा अक्षर मंत्रोच्चार से शांतिधारा के साथ दिन की शुरुआत की।

सुमधुर वाद्यों एवं संगीतमय वातावरण में बेबी मिशिका छाबड़ा ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर दीप प्रज्वलन का अवसर सुषमा जैन, संध्या जैन (पारसोला राजस्थान दिगंबर जैन समाज) को मिला।

मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का लाभ आदित्य- प्रियंका जैन अशोक नगर ने लिया।

इसके साथ ही जिनवाणी भेंट का लाभ भाग्योदय महिला मंडल अंजनी नगर एवं पन्नालालजी जैन परिवार को मिला।

मुनि श्री का लिया आशीर्वाद

इस अवसर पर अमृता सोलंकी, राष्ट्रीय जनजाति आयोग में “वरिष्ठ अन्वेषक” मूलतः विभाग, मध्य प्रदेश पुलिस इंदौर, दीपक जैन, पीयूष जोशी के साथ-साथ समवशरण दिगंबर जैन महिला मंडल- मोदीजी की नसियां, चंद्रप्रभु दिगंबर जैन महिला मंडल- मल्हारगंज, अंजनी नगर दिगंबर जैन महिला मंडल एवं दिगंबर जैन समाज पारसोला,राजस्थान ने मुनि श्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।

समाज श्रेष्ठी डॉ. प्रकाशचंद्र जैन, नकुल पाटोदी, विमल नाहर सहित अनेकों समाज सेवियों ने मुनिश्री के समक्ष श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रीफल युक्त अर्घ्य किए गए समर्पित

विधान समिति के प्रमुख नरेन्द्र वेद व कमलेश जैन ने बताया कि कल्पद्रुम महामंडल विधान के तहत प्रातःकाल मंगलाष्टक के बाद विधान मंडप में विराजित समस्त जिन प्रतिमाओं के अभिषेक एवं शांतिधारा चक्रवर्ती समूह द्वारा किए गए।

इसके बाद विनय पाठ, पूजा पीठिका, नवदेवता पूजा के पश्चात इंद्र-इंद्राणियों के समूह द्वारा विधान मंडल पर अष्टद्रव्य और श्रीफल युक्त शताधिक अर्घ्य समर्पित किए गए।

https://www.youtube.com/live/udNZ5kzIWEo?si=lVKLX9u6zyYCMG4V

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