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तप कल्याणक : जिससे आत्मा पवित्र होती है उसका नाम पुण्य है : आचार्य विशुद्ध सागर जी


ग्राम गिरार में श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया व पं सनत कुमार, विनोद कुमार के द्वारा विधि-विधान पूर्वक तप कल्याणक की क्रियाओं को सम्पन्न कराया गया। पढ़िए प्रियंक जैन सर्राफ की रिपोर्ट…


मड़ावरा। ग्राम गिरार के अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की छत्रछाया व चर्याशिरोमणी आचार्य विशुद्ध सागर जी सहित 27 श्रमण मुनियों के मंगल सानिध्य में भक्तिभाव पूर्वक आयोजित किये जा रहे श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में चौथे दिन प्रतिष्ठाचार्य जयकुमार निशांत भैया व पं सनत कुमार, विनोद कुमार के द्वारा विधि-विधान पूर्वक तप कल्याणक की क्रियाओं को सम्पन्न कराया गया। महोत्सव में प्रतिदिन ही हजारों श्रद्धालुओं द्वारा अतिशयकारी आदिनाथ भगवान के दर्शन कर पंचकल्याणक महोत्सव में पुण्य का संचय किया जा रहा है।

निकली आदिकुमार की भव्य बारात

चौथे के आयोजन में सुबह से ही श्रद्धालुओं का गिरार जी में आने का क्रम प्रारम्भ हो गया थ। प्रातःकालीन बेला में प्रतिदिन की भांति भगवान जिनेन्द्र देव की प्रतिमा के अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजा आदि के उपरांत तपकल्याणक की क्रियाओं का विधिविधान पूर्वक प्रारम्भ किया गया। दिल्ली से आये प्रसिद्ध मंच कलाकार मनोज शर्मा एंड पार्टी द्वारा धार्मिक नाटिकाओं के माध्यम से माहौल को धर्ममय बनाने का प्रयास किया। इसके बाद दोपहर में आदिकुमार की भव्य बारात निकाली गई, जो अयोध्या नगरी की परिक्रमा करके वापिस महोत्सव स्थल पहुंची। बारात में शामिल इंद्र-इंद्राणियों द्वारा भक्ति गीतों पर नृत्य किया गया। इसके साथ ही जैन नवयुवक अपने-अपने दिव्यघोषों को गुंजायमान करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। महोत्सव में दूर-दूर से आए अतिथि महानुभावों का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति द्वारा स्वागत-सम्मान किया गया। युवराज आदिनाथ का विवाह राज्यभिषेक व वैराग्य संपन्न हुआ।

बालक आदिकुमार को हुआ वैराग्य

मज्जिनेन्द्र जिन बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में पहले बालक आदिनाथ का विवाह महारानी नंदा- सुनंदा से हुआ, फिर एक दिन राजा नाभिराय ने शुभ घड़ी देखकर युवराज आदिनाथ का राज्याभिषेक किया। देवराज इंद्र स्वर्ग से नये वस्त्र आभूषण लेकर अयोध्या नगरी पहुंचे और युवराज को भेंट किए। इसके अलावा आर्य खण्ड के सभी 32 हजार राज्यों के महाराजा हीरे-जवाहरात की भेंट लेकर अयोध्या नगरी में पहुंचे। फिर आदिनाथ का परिवार बढ़ता है उनके युवा पुत्रों बाहुबली एवं भरत तथा पुत्रियां राजकुमारी ब्रह्मी एवं सुंदरी का जन्म होता है। महाराज के दरबार में एक दिन भरी सभा में नीलांजना नाम की नर्तकी नृत्य कर रही थी। उसी दौरान नृत्य करते-करते उसके प्राण पखेरू उड़ गये। देवराज इंद्र ने अपनी लीला से उसी क्षण दूसरी नर्तकी की भेज देते हैं लेकिन आदिनाथ को पता चल जाता है। मन पर्याय ज्ञान अवधिज्ञान उत्पन्न होकर वैराग्य हो जाता है। उनके माता पिता व परिवार जन द्वारा उन्हें लाख समझाने के बाद भी वह वन में प्रस्थान कर जाते हैं। महोत्सव के दौरान जब वैराग्य का प्रसंग हुआ तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। आदिकुमार को जैसे ही वैराग्य उत्पन्न हुआ, आदिकुमार द्वारा मुनिदीक्षा लेने का मन बना लिया गया। आचार्य भगवन विशुद्ध सागर जी ने बालक आदिकुमार की प्रतिमा के ऊपर बीजाक्षर मन्त्रों का लेखन कर दीक्षा संस्कार विधि संपन्न की।

जिससे आत्मा पवित्र होती उसका नाम पुण्य

आचार्य विशुद्ध सागर जी मुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिससे आत्मा पवित्र होती है, उसका नाम पुण्य है। जो क्रिया तुमको मधुरता देती है लेकिन करने के बाद तुम्हें उदास कर देती हो, उसका नाम पाप है। व्यक्ति झूठ बोलने की तैयारी करता है, बोलता है लेकिन उसके बाद पछताता है। एक झूठ छिपाने के लिए हजारों झूठ बोलने पड़ते हैं। पुण्य से वो बच रहे, जिन्हें पाप से डर नहीं लगता। कर्म की डांट का पता आंख बंद होने के बाद पता चलेगा।पंचकल्याणक महोत्सव में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति व अतिशय क्षेत्र गिरार जी प्रबन्धकारणी समिति द्वारा पूर्ण मनोयोग से सर्व सुविधायुक्त व्यवस्थाओं का प्रबंध किया जा रहा है। महोत्सव में पुलिस कर्मियों द्वारा समारोह स्थल की सुरक्षा व्यवस्था अच्छे से संभाली जा रही है।

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