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दस दिवसीय जैन रामायण कथा का समापन मंगलवार को: मुनिश्री जय कीर्ति बता रहे हैं राम कथा का सार 


मुनि जयकीर्ति राम कथा का सार, कथा सुनने का फल और जीवन में प्रभाव के बारे में बताएंगे। सोमवार शाम हुई महाआरती एवं भक्ति संध्या में श्रद्धालु झूमे। मंगलवार को कथा का समापन किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी मुख्य अतिथि एवं उप मुख्यमंत्री डॉ प्रेमचन्द बैरवा विशिष्ट अतिथि होंगे। जयपुर से पढ़िए, यह खबर… 


जयपुर। जिनवचन हमेशा प्रामाणिक ही होते है। संसार असार है, जिन शरण ही सच्ची शरण है। ये उद्गार गुलाबी नगरी जयपुर की पावन धरा पर पहली बार दुर्गापुरा के श्री दिगंबर जैन मंदिर चंद्र प्रभजी में राजस्थान जैन युवा महासभा, जैन कनेक्ट, दुर्गापुरा जैन मंदिर ट्रस्ट एवं महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में चल रही दस दिवसीय जैन रामायण कथा के नवें दिन सोमवार को मुनि जयकीर्ति महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कथा के दौरान सीता की अग्नि परीक्षा, लवकुश का जन्म, लवकुश का राम लक्ष्मण से युद्ध, सीता को वैराग्य, जिनेश्वरी दीक्षा धारण सहित अन्य प्रसंगों का चिरपरिचित शैली में चित्रण किया।

राजस्थान जैन युवा महासभा जयपुर के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जैन एवं महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि प्राचीन जैन ग्रंथ ‘पद्मपुराण’ पर आधारित जैन रामायण कथा के संगीतमय आयोजन में भगवान चंद्र प्रभू के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन युवा समाजसेवी डॉ.राजीव जैन अंजू जैन, जैन सोश्यल ग्रुप महानगर के अध्यक्ष सुशील सरिता कासलीवाल एवं विनोद जैन कोटखावदा, जयकुमार जैन, प्रकाश चांदवाड, राजेंद्र काला, अनुज जैन, अतीव जैन, सुखानंद काला, जीसी जैन, पारस जैन पार्श्वमणि आदि ने किया। ब्रह्मचारिणी पल्लवी दीदी ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।

मुनिश्री जयकीर्ति महाराज के पाद पक्षालन सुनील माया, अंकित प्रियंका, अभिनव कल्पना, आयुष पायल संगही परिवार, राजा श्रेणिक परिवार एवं एडवोकेट राजेश संगीता काला, मुनि भक्त शांति कुमार मीना पाटनी ने कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के मुख्य श्रोता राजा श्रेणिक के रुप में सूर्य प्रकाश कृष्णा, अनुज नीरु, मिलिंदगुंजन छाबड़ा, ईशान तनु गोधा, खुशी, काश्वी, रिनाया छाबड़ा परिवार का गाजोंबाजों के साथ सभागार में जयकारों के बीच आगमन हुआ। राजा श्रेणिक परिवार द्वारा मुनि श्री को जिनवाणी भेट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। राजा श्रेणिक सूर्य प्रकाश अनुज छाबड़ा परिवार द्वारा किये गये प्रश्न का मुनि श्री द्वारा समाधान के रुप में रविषेणाचार्य द्वारा रचित प्राचीन जैन ग्रन्थ ‘पद्मपुराण’ में उल्लेखानुसार जैन रामायण कथा का वाचन प्रारंभ किया।

राजा वज्रजंघ से सीता को सांत्वना मिलती है

गुरुदेव के मुखारविंद से चल रही जैन राम कथा में नवें दिन मुनि श्री ने बताया कि ‘अवर्णवाद के कारण सेनापति सीता को सिंहनाद वन छोड़कर आ जाते हैं। राम को बहुत पश्चाताप होता है। लक्ष्मण राम को संबोधित करते हैं…. ‘वेदवती पर्याय में सीता ने मुति और आर्यिका से अपवाद किया था। इसलिए उनको वनवास मिला… राजा वज्रजंघ से सीता को सांत्वना मिलती है। बहन के रूप में स्वीकार करके अपने नगर ले जाते हैं। वहां पर भव्य स्वागत होता है। लव और कुश का जन्म होता है। क्षुल्लक सिद्धार्थजी से विद्या ग्रहण करते हैं फिर नारद जी के द्वारा दोनों पुत्रों को राम लक्ष्मण का सारा वृत्तांत सुनाया जाता है। लव कुश का राम लक्ष्मण से युद्ध होता है। फिर राम का लव कुश से मिलन होता है सीता पुनः पुंडरीक के नगर में लौटती है।

अग्नि परीक्षा देती है तो अग्नि का कुंड जल का तालाब बन जाता है

हनुमान और सुग्रीव राम को पुनः सीता को लाने के लिए कहते हैं फिर सीता का पुनः अयोध्या में आगमन होता है। सीता धन्य हो रूप धन्य हो। राम सीता से क्रोधित होकर दूर हट जाओ आदि कटु वचन बोलते हैं। राम और सीता में बहुत भारी संवाद होता है सीता कहती है मैं किस प्रकार अपने को निर्दाेष सिद्ध करूं..? महापुरुषों की पत्नियों में कोई विकार नहीं होता है। सकल भूषण मुनिराज पर उपसर्ग होता है और फिर उनको केवल ज्ञान हो जाता है। सीता अग्नि परीक्षा के लिए तैयार होती है। पंच नमस्कार मंत्र का स्मरण करते हुए अग्नि परीक्षा देती है तो अग्नि का कुंड जल का तालाब बन जाता है। .अब सीता को वैराग्य हो जाता है वह पृथ्वीमति आर्यिका से जनेश्वरी दीक्षा को ग्रहण करती है। अंत में सीता को भी जिनेन्द्र प्रभु की शरण में ही जाना पड़ा और मुक्ति का मार्ग अपनाया और अच्छी तरह से समझ लिया कि. ‘संसार असार है‘ जिनशरण ही सच्ची शरण है। गुरुदेव ने बहुत अच्छी तरह से इस भव्य राम कथा को समझाया और गुरुदेव द्वारा गाए जाने वाले सभी गीत ‘स्वरचित’ हैं।

सभी अतिथियों ने श्रीफल भेंट कर मुनिश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया

राम कथा को सुनने के बाद वैराग्य के भाव आ ही जाते। मंच का सफल संचालन राजस्थान जैन युवा महासभा के प्रदेश महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा ने कर आजोजन में चार चांद लगा दिए। आभार मुख्य संयोजक अनुज जैन ने व्यक्त किया। इस मौके पर डीआईजी स्टाम्प डॉ. गोरधनलाल शर्मा आरएएस, एसीपी आदित्य पूनिया, पार्षद दामोदर मीना, जैन गजट संवाददाता पारस जैन पार्श्वमणि, विनोद सुधा जैन सहित सभी अतिथियों ने श्रीफल भेंट कर मुनिश्री से आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति के संजय पांडया, सुभाष बज, चेतन जैन निमोडिया ,राज कुमार सेठी, कमलेश जैन, राहुल गोधा, संदीप जैन, दीपिका गोधा, रेखा पाटनी आदि ने अतिथियों का स्वागत किया।

संदेशात्मक भजनों की प्रस्तुति दी गई

दुर्गापुरा जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रकाश चांदवाड एवं मंत्री राजेन्द्र काला ने बताया कि सायंकाल 7.00 बजे राजा श्रेणिक परिवार एवं उपस्थित सैकडो श्रद्धालुओं द्वारा जिनेन्द्र देव की आरती के बाद मुनि श्री की भव्य आरती की गई। गुरु भक्ति के आयोजन के बाद प्रसिद्ध गायक सुभाष बज द्वारा पदमप्रभू चालीसा का पाठ, आध्यात्मिक एवं संदेशात्मक भजनों की प्रस्तुति दी गई। राजस्थान जैन युवा महासभा जयपुर के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप जैन एवं महामंत्री विनोद जैन कोटखावदा के मुताबिक मंगलवार, 27 मई को जैन रामायण कथा के दस दिवसीय आयोजन का समापन होगा। प्रातः 8.15 बजे से मुनि श्री जयकीर्ति महाराज के मुखारविंद से राम का मोक्ष एवं राम कथा सुनने का फल एवं इसका जीवन पर प्रभाव बताया जाएगा। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा शामिल होंगे। सायंकाल 7.00 बजे से भव्य संगीतमय आरती एवं गुरु भक्ति के आयोजन होंगे।

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