जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ जी का तप कल्याणक तिथि के अनुसार वैशाख शुक्ल नवमी के दिन मनाया जाएगा। इस बार यह तिथि सोमवार 5 मई को आ रही है। भगवान सुमतिनाथ का तप कल्याणक धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। भगवान सुमतिनाथ के तप कल्याणक पर श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला के तहत आज उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह विशेष प्रस्तुति पढ़िए…
इंदौर। जैन धर्म के पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ का तप कल्याणक वैशाख शुक्ल नवमी के दिन मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 5 मई सोमवार को आ रही है। इस दिन संपूर्ण देश में दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के तप कल्याणक पर विविध धार्मिक कार्यक्रम किए जाएंगे। भगवान सुमतिनाथ जी का अभिषेक और शांतिधारा सहित अर्घ्य अर्पित करने के लिए समाजजनों में धार्मिक उल्लास है। ज्ञात स्रोतों के अनुसार भगवान सुमनिनाथ का तप वैशाख शुक्ल नवमी को हुआ था। उन्होंने इसी दिन दीक्षा भी ली थी। एक हजार राजाओं के साथ बेला परणा स्थल विजयपुर में तपस्या की थी। भगवान सुमतिनाथ के तप के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं। वैशाख शुक्ल नवमी को एक हजार राजाओं के साथ दीक्षा लेने के बाद भगवान सुमतिनाथ ने लगभग 20 वर्ष तक तपस्या की थी। भगवान सुमतिनाथ ने दीक्षा प्रियंगु वृक्ष के नीचे ग्रहण की थी। भगवान सुमतिनाथ को पहला आहार द्युम्द्युति राजा के यहां से खीर का मिला था। भगवान सुमतिनाथ ने अपने तप के माध्यम से ज्ञान और मोक्ष प्राप्त किया था।
मानव जाति के कल्याण के लिए दिए संदेश
भगवान सुमतिनाथ जी ने अपने जीवन काल में जैन धर्मावलंबियों और समस्त मानव जाति को सत्य और अहिंसा के पथ पर चलने के लिए उपदेशित किया। भगवान ने इस मूल मंत्र को स्वयं तो जीवन में उतारा ही था। साथ ही मानव समाज के लिए उन्होंने अपने उपदेशों और धर्मसभाओं में सर्वाधिक जोर देकर धर्म मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। अपने धर्म पर अडिग रहने और सत्याचरण कर जीवों पर दया और हिंसा का त्याग करने का संदेश भी संपूर्ण दुनिया को दिया।













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