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हमारा अस्तित्व त्रिकाली है, कोई मिटा नहीं सकताः अधर्म के साथ सोने की लंका में रहने की अपेक्षा धर्म के साथ वनवास में रहना श्रेष्ठ है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज

जन्म होगा और जन्म हुआ है तो मरण भी होगा। हम एक दिन भी जियेंगे तो आनंद के साथ जियेंगे। चूहे की तरह सौ दिन जीने की अपेक्षा शेर की तरह एक दिन जीना काफी है, रोते...

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करने का मन होता है तो अधर्म हैः मोबाइल के अंदर लगे चित्र से तुम्हारे अंदर के चरित्र पता चल रहा है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज

जैन दर्शन ने सूत्र दिया-तुम कौन हो? हर व्यक्ति ये जानने का प्रयास कर रहा है कि मुझे क्या करना चाहिए, क्या जानना चाहिए? मुझे क्या बोलना, पढ़ना चाहिए? मैं क्या...

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हमारे ऋषियों ने वसुदेव कुटुंबकम का संदेश दिया: घर के मुखिया की सोच स्पष्ट और सशक्त होनी चाहिए -प्रज्ञासागर महाराज

आचार्यश्री प्रज्ञासागर जी महाराज भवानीमंडी में विराजित होकर धर्म प्रभावना बिखेर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को अपने प्रवचन में वसुदेव कुटुंबकम का संदेश देकर...

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व्यक्ति अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाताः जो तुम्हारे पास नहीं है उसको कभी याद नहीं रखना और जो है उसको कभी भूलना मत-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी 

सारे भक्तों से कहना है-माँ बाप का कहना मानना या नही मानना। लेकिन माँ बाप से झूठ मत बोलना। वो पाप मत करना जिसको छुपाने के लिए माँ-बाप से, गुरु से झूठ बोलना पड़े...

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मेरे पास है उससे ज्यादा दुनिया के पास नहीं हैः उसका साथ दो, जिसका कोई साथ नही देता-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी 

धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। जो मेरे में है उससे ज्यादा दुनिया में नहीं है और जो मेरे में नहीं है बाकी...

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दृष्टि बदल दो, सृष्टि बदल जायेगी-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजीः व्यक्ति को लगे कि इसका सुख मेरे अधीन, वही से शोषण चालू

धर्मसभा में प्रवचनों के दौरान जैन धर्म अनुयायी बड़ी संख्या में पुण्यार्जन कर रहे हैं। धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि प्रकृति को एक माँ की...

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गार्जियन के थप्पड़ को भी जो आशीर्वाद मान लेता है, उसे आशीर्वाद सदा सदा फलते रहते है : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज: बड़े लोग गाली भी दे तो उसे मंत्र मानकर स्वीकार करना

दुनिया का जो सिस्टम है उसे हमें समझना होगा क्योंकि सृष्टि मूक होती है और मूक व्यक्ति के भाव को समझना बहुत कठिन होता है। बेटी की इच्छा है तो माँ-बाप को समझ में...

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एक नियम ले लो किसी अच्छे व्यक्ति की बुराई मत सुनना-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजीः साधु की आलोचना इतनी न हो कंही साधु बेकाबू हो 

न जाने कितने लोगों के पास ज्ञान होता है लेकिन अनुभव नहीं होने से वह कोई कार्यकारी नहीं और अनुभव आता है क्रिया में। रावण के पास ज्ञान था लेकिन अनुभव, चारित्र...

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व्यक्ति को समझ में नहीं आता कि सही क्या है और गलत क्याः अपने को समझना कठिन नहीं है, दूसरे को समझाना ज्यादा कठिन है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी

अच्छे लोगों का स्वभाव पेचीदा नहीं होता लेकिन गंदे लोगों का स्वभाव पेचीदा होता है। कभी-कभी गलत भी जरूरी है, संसार के संबंध में जब तार्किक दृष्टि से सोचते है तो...

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माता पिता बेटों से कॉम्प्रोमाईज़ कर लेते हैः हम जो चाहेंगे वह होगा, ये है स्वयंभू बनने का लक्षण-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज

भगवान ने जो देखा है वही होगा, समय से जो होना होगा वही होगा। दूर हो जाने से रिश्ते टूट जाते हैं ऐसा कोई नियम नहीं है और पास रहने से रिश्ते बने रहते हैं ये भी...

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