Tag - वर्द्धमानपुर शोध संस्थान

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भगवान श्री आदिनाथ एवं श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या थाईलैंड में : भीरू शाश्वत तीर्थ के रूप में पूजित है ये नगरी

उत्तरप्रदेश में अयोध्या नगरी स्थित है। जिसको शाश्वत तीर्थ का श्रेय प्राप्त है। इस बात से बहुत कम लोग परिचित हैं कि एक अयोध्या थाईलैंड में भी है। यह नगरी...

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चीन में भी समृद्ध था जैन दर्शन : चीन में प्राप्त मूर्तिया कर रहीं है तस्दीक

चीन के जियान शहर में सड़क के निर्माण के दौरान जमीन में लगभग 700 दिगंबर मूर्तियां प्राप्त हुई थी। चीन में महावीर के पहले जैन धर्म था। यह तथ्य आदिनाथ की...

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तीर्थंकर की अलग-अलग प्रतिमाओं के साथ चतुर्विंशंती तीर्थंकर प्रतिमाएं बनने की परम्परा रही हैः प्रमुख केंद्रीय तीर्थंकर कायोत्सर्ग मुद्रा में 

जैन धर्म के तीर्थंकरों की प्रतिमाओं के बारे में जानकारिया दी जा रही है। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान से जुडे़ ओम पाटोदी हमें इस बारे में नई एवं खोजपूर्ण जानकारियॉ...

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आदिनाथ और महावीर स्वामी की प्रतिमा पर अद्भुत अद्वितीय शिल्प: एक ही प्रस्तर पर कल्पनातीत चमत्कार 

मूर्तिकला, भारतीय स्थापत्य कला के बारे में जितना गहराई से विवेचन करेंगे तो उतना ही यह हमें चमत्कृत करने के लिए विवश करती है। भारत की सरजमीं पर शिल्पकारों ने...

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तमिलनाडु का भू-भाग: आदिनाथ व जैन तीर्थंकरों की अतिप्राचीन प्रतिमाओं से समृद्ध

तमिलनाडु में जैन धर्म की तीर्थंकर प्रतिमाएं एवं मंदिर मौजूद है। यहां के गौरवशाली इतिहास को काफी नुकसान हुआ है। परन्तु अभी भी जो अवशेष बच गये है वे इतनी संख्या...

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भगवान आदिनाथ की पुरा महत्व की मूर्तियां देश में उपलब्ध : बावनगजा में है विश्व प्रसिद्ध आदिनाथ जी की प्रतिमा

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जिनका जन्मोत्सव चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की नवमी 23 मार्च रविवार को आ रही है। यह जन्मोत्सव संपूर्ण विश्व में मनाया जा...

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भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का 2872वां ज्ञान कल्याणक दिवस 18 मार्च को : हरिवंश पुराण में है वर्द्धमानपुर के पार्श्व चैत्य का उल्लेख

जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का जन्म 877 वर्ष ईसा पूर्व बनारस में हुआ था।उन्होंने 30 वर्ष की आयु में दीक्षा ग्रहण की। चैत्र मास की...

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आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर किया अर्घ्य समर्पित: आर्यिका दुर्लभमति माताजी ससंघ के सानिध्य में हुआ कार्यक्रम

आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनिश्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका दुर्लभमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में दिगंबर जैन समाज...

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आचार्यश्री विद्या सागरजी के प्रवचनों से मिली प्रेरणाः महिला मंडल के गौसेवा के कार्य की हो रही प्रशंसा

जलगांव (महाराष्ट्र) के जैन समुदाय के श्री दिगम्बर जैन श्राविका महिला मंडल के सदस्यों द्वारा जीवदया के कार्य को आगे बढ़ाते हुए, एक गौमाता को कत्लखाने जाने से...

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गणतंत्र दिवस एवं आचार्यश्री के प्रथम समाधि दिवस के पूर्व मूल संस्कृति को अपनाने का संदेश दियाः ‘भारत बने भारत‘ के नारे के साथ आहवान 

अंग्रेज तो चले गए परन्तु हम आज़ तक उनके द्वारा लादे गए कुसंस्कारों का बोझ ढोते जा रहें हैं। आचार्यश्री विद्यासागरजी महा मुनिराज ने उक्त बातों का गहन चिंतन करते...

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